दो समुदायों की मारपीट में घायल एक व्यक्ति की मौत, परिजनों ने लगाया जाम
- पुलिस की ओर से कार्रवाई न करने व दूसरे पक्ष के लोगों को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर लगाया जाम
- करीब तीन घंटे बाद एसीपी की ओर से आरोपियों की गिरफ्तारी के आश्वासन पर ग्रामीणों ने खोला जाम
अमर उजाला ब्यूरो
बरवाला। गांव जसवंतगढ़ में 30 जुलाई को दो समुदायों के बीच हुई मारपीट और पथराव में करीब 10 लोग घायल हो गए थे। घटना में कश्मीरी, अजमेर, जयकुमार, कर्मचंद, अमर सिंह, लाजो देवी सहित कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। जिनका इलाज पीजीआई चंडीगढ़ व सेक्टर-32, चंडीगढ़ में चल रहा था। लेकिन घायल अमर सिंह (42) पुत्र रौणकी राम की अचानक तबीयत खराब होने से मंगलवार को उसकी मौत हो गई। जिसके बाद मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने सड़क पर जाम लगा दिया।
जाम के दौरान परिजनों, महिलाओं व ग्रामीणों ने शव को रखकर दूसरे पक्ष के लोगों के खिलाफ पुलिस की ओर से कार्रवाई न करने व दूसरे पक्ष के लोगों को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर एनएच-73 पर कोट मट्टावाली में जाम लगा दिया। जिसके बाद घटना की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल एसीपी आदर्शदीप के नेतृत्व में मौके पर पहुंचा। एसीपी ने परिजनों से मृतक की मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद दूसरे पक्ष के आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इस दौरान करीब तीन घंटे तक लगा जाम एसीपी के आश्वासन के बाद शाम 7.15 बजे खुला। वहीं, जाम को देखते हुए पुलिस ने यातायात को दूसरी मार्गों से डायवर्ट कर दिया था।
मलबा उठाने को लेकर दो समुदायों में हुआ था झगड़ा
शिकायत कर्ता व रामरत्न के अनुसार गांव में खेड़ा व मस्जिद के बीच कुंआ है, जहां हर साल भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी 4 अगस्त को भंडारे का आयोजन किया जाना तय हुआ था। उधर एक समुदाय की ओर से किए जा रहे निर्माण के कारण कुएं के आस-पास काफी मलबा पड़ा था। इस दौरान मलबा उठाने को लेकर दोनों समुदायों में झगड़ा हो गया। जिसमें दूसरे पक्ष के लोगों ने शिकायतकर्ता पक्ष के लोगों के घरों में घुसकर र्इंट, पत्थर, लाठी डंडों से मारपीट की। उधर, इस मामले में दूसरे पक्ष की ओर से दी गई शिकायत में महिला से छेड़छाड़, मारपीट और धमकियां देने की शिकायत दी गई थी। जिसमें पुलिस ने दोनों पक्षों के कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पुलिस ने रामरत्न की शिकायत पर दूसरे समुदाय के करीब 50 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था और दूसरे पक्ष की शिकायत पर करीब 20 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। उसी दिन से गांव में तनाव का माहौल था और इस तनाव के कारण वहां पर पुलिस तैनात की गई थी।