50 घंटे बाद इम्पीरियल गार्डन सोसाइटी में राहत और बचाव का काम पूरा
हादसे में नहीं हुआ कोई हताहत: एनडीआरएफ
आसपास के लोगों में दहशत बरकरार, एसडीएम की जांच पर प्रोजेक्ट क भविष्
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला/जीरकपुर।
पीरमुछल्ला स्थित इम्पीरियल गार्डन सोसाइटी में गुरुवार को ढहने वाली तीन मंजिला इमारत के मलबे को एनडीआरएफ की टीम ने शनिवार दोपहर 12 बजे तक हटा लिया। हालांकि एनडीआरएफ की ओर से किए गए करीब 50 घंटे के ऑपरेशन को खत्म कर दिया है। भवानी सिंह के नेतृत्व में एनडीआरएफ के 30 जवानों ने किसी के दबे होने की आशंका को दूर करने के लिए उनकी तलाश में दिन-रात एक कर दिया। हालांकि अभियान खत्म होने पर टीम ने किसी भी व्यक्ति के दबे न होने की पुष्टि कर दी है।
इमारत ढहने के बाद वहां मची अफरातफरी को देखते हुए मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंच गई। इस दौरान एंबुलेंस सहित अन्य बचाव और राहत कार्य में एनडीआरएफ की टीम जुट गई। राहत और बचाव में जुटी टीम ने चार जेसीबी, दो बड़ी पोकलेन मशीन और हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया था। इसके अलावा नगर कौंसिल जीरकपुर और स्थानीय पुलिस, सेहत विभाग के कर्मचारी व अधिकारी लगातार ड्यूटी पर तैनात रहे। शनिवार दोपहर तक की कार्रवाई में किसी के भी हताहत होने की पुष्टी नहीं हुई है।
जिला मोहाली की डिप्टी कमिश्नर गुरप्रीत कौर सपरा ने घटनास्थल का जायजा लेकर एसडीएम परमजीत सिंह, डेराबस्सी को गिरी हुई इमारत के अलावा इसी जगह बनी अन्य कॉलोनियों की भी जांच के आदेश दिए थे। डिप्टी कमिश्नर ने कहा था कि दोषी पाए गए किसी भी आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, इस दुर्घटना के दौरान दर्ज हुई एफआईआर में इस प्रोजेक्ट के 11 नामजद हिस्सेदार ओपी सिंगला, मनदीप सिंगला, अमित सिंगला, पवन गोयल, परवीन कुमार, सुनील अग्रवाल, पुष्पिंदर गोयल, सुरेश सिंगला, विनोद कुमार के साथ दो और लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 336, 337, 288, 427, 120 बी के तहत केस दर्ज किया था। अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। एनडीआरएफ की टीम ने राहत और बचाव कार्य पूरा होने के बाद इस हादसे में किसी के मौत की पुष्टि न होने की बात साफ की तो बिल्डरों ने राहत की सांस ली।
इम्पीरियल गार्डन सोसाइटी में घटी दुर्घटना के बाद न केवल रीयल एस्टेट के दिग्गजों के माथे पर शिकन है बल्कि खरीदार भी परेशान हैं। यहां रहने वाले भी अब खौफ में जी रहे हैं कि कई उनकी बिल्डिंग की नींव कमजोर से ऐसा कोई हादसा न हो जाए। इस कालोनी में चल रहे फ्लैट्स के निर्माण का भविष्य एसडीएम, डेराबस्सी परमजीत सिंह की रिपोर्ट पर निर्भर है क्योंकि डीसी मोहाली ने उन्हें गिरी हुई इमारत के अलावा शहर में बनी अन्य तीन मंजिला इमारतों की भी जांच के आदेश दे दिए थे। वही खरीदारों का कहना है कि साफ सुथरी छवि वाले रीयल एस्टेट के बिल्डर तो अपना प्रोजेक्ट पूरा कर लेंगे, मगर जिन लोगों ने इस क्षेत्र में पहल की है उन्हें काफी मुश्किलों से जूझना पड़ सकता है। अब इस सोसाइटी में खरीदारों और बेचने वाले बिल्डर्स के बीच प्रॉपर्टी विवाद भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।