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वर्षों से नौकरियों की चल रही है खरीद बिक्री

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वर्षों से नौकरियों की चल रही है खरीद बिक्री
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- नौकरी के नाम पर 28 लाख की ठगी पर ठनी
- पुलिस ने दी आरोपी दंपति को क्लीन चिट, शिकायतकर्ताओं ने गिरफ्तारी की मांग

अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
नौकरी देने के नाम पर लाखों की ठगी का सिलसिला वर्षों से चल रहा है। एचएसएससी की ओर से सिंचाई विभाग में ट्रेसर और एसआई (कोऑपरेटिव) में नौकरी के लिए 28 लाख रुपये की ठगी में शामिल आरोपियों ने न केवल रुपये ऐंठ लिए बल्कि नौकरी दिलवाने के नाम पर जिन उम्मीदवारों से रुपये लिए उनके जाली सर्टिफिकेट भी बनवाए गए थे। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने आरोपी दंपति को यह कहकर क्लीन चिट दे दी थी, क्योंकि पुलिस का कहना है कि युवाओं के साथ इनका समझौता हो गया था। लेकिन सोनीपत के उम्मीदवारों ने विरोध करते हुए दंपति पर भी कार्रवाई की मांग की है।
सोनीपत निवासी अजय कुमार, अजीत, संदीप कुमार और नरेंद्र के मुताबिक 2013 में सोनीपत के गोहाना के गांव सिवानका निवासी सूरजभान से उनकी मुलाकात हुई। सूरजभान ने बातचीत में बताया कि एचएसएससी में उनकी अच्छी जान-पहचान है और उनका एक दोस्त है जिसकी मदद से रुपये लेकर नौकरियां दिलवाएगा। इसके बाद सूरजभान अपने साथ चार युवकों सहित प्रदीप और कुलदीप को 2013 में कालका निवासी मुकेश सैनी के निवास पर मुलाकात के लिए ले गया। वहां मुकेश के अलावा सेक्टर-19 निवासी राजबीर चौहान और अनीता मौजूद थे। मुकेश ने सभी छह युवकों को बताया कि राजबीर और अनीता ही नौकरियां लगवाते हैं और इससे पहले भी कई नौकरियां दिलवाई गई है। विश्वास में लेने के बाद भोले-भाले युवकों से आरोपी राजबीर चौहान, अनीता, मुकेश और सूरजभान ने 28 लाख रुपये चुकाने की बात कहते हुए नौकरी का सौदा किया। नौकरी की लालच में सभी युवक रुपये देने को राजी हो गए और बाद में यह रकम अदा भी कर दी गई।
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शिकायतकर्ताओं ने बताया कि राजबीर ने उनके सर्टिफिकेट लेने के बाद खुद ही उम्मीदवारों के फॉर्म भरे। इसके लिए उम्मीदवारों के फर्जी सर्टिफिकेट भी बनाए गए। दो उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं थी, जिनके लिए आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज भी बनवाए ताकि उन्हें पक्की नौकरी को लेकर भरोसा हो जाए। इसके बाद उम्मीदवारों ने राजबीर और अनीता को 24 लाख रुपये दे दिए और बाद में चार लाख रुपये उधार के तौर पर दिया। इनके रोल नंबर भी जारी किए गए और फरवरी 2014 में ट्रेसर और एसआई पद के लिए उम्मीदवारों के इंटरव्यू भी हुए। राजबीर ही इन उम्मीदवरों को कमीशन के दफ्तर में इंटरव्यू के लिए ले गया, लेकिन बगैर कोई सवाल चंद मिनटों में ही सभी उम्मीदवार वापस बाहर आ गए।
शिकायतकर्ताओं ने बताया कि नौकरी का रिजल्ट आने के बाद जब उनके नाम नहीं आए तो इस बारे में पूछा। बाद में 28 लाख रुपये लौटाने की मांग भी की गई, लेकिन माकूल जवाब न मिलने पर सीएम विंडो पर शिकायत दी गई फिर बाद में इस मामले की अक्तूबर 2016 में पुलिस को शिकायत दी गई। पुलिस ने कालका थाने में सूरजभान, मुकेश सैनी, राजबीर चौहान एवं अनीता के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया। अजय कुमार, संदीप कुमार, नरेंद्र एवं अजीत के अनुसार एफआइआर दर्ज होने के बाद कुलदीप एवं प्रदीप के पिता जयपाल को पंचायत में राजबीर एवं अनीता ने उधार में लिए चार लाख रुपये वापस कर यह लिखवा लिया कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहते। लेकिन अन्य चार से ऐसा समझौता नहीं हो सका, नतीजतन उनके लाखों रुपये डूब गए।
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ड्राइवर भर्ती: 21 उम्मीदवारों ने इंटरव्यू का मौका देने की मांग की
पंचकूला। ड्राइवर पद पर भर्ती के लिए एचएसएससी की ओर से आयोजित लिखित परीक्षा में पास होने वाले उम्मीदवारों ने सीधे इंटरव्यू में मौका देने की मांग की है। उनका आरोप है कि ड्राइविंग टेस्ट के दौरान धांधली हुई और इस वजह से ही 21 उम्मीदवारों को अब तक वीडियोग्राफी मुहैया नहीं की गई। दावा है कि वे ड्राइविंग टेस्ट में पास हैं, इसलिए उन्हें वीडियोग्राफी नहीं मुहैया की गई। क्योंकि उस दौरान रुपयों की मांग की गई थी। ड्राइवर पद पर भर्ती के लिए 225 उम्मीदवारों ने वीडियोग्राफी के लिए आवेदन दिए थे, लेकिन इस मामले में अदालत के निर्देश के बावजूद अब तक 21 उम्मीदवारों को वीडियोग्राफी मुहैया नहीं करवाई गई।
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