कैप्टन अमरिंदर सिंह और मोहिंदर सिंह केपी
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सोमवार को पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने माडल टाउन स्थित पूर्व सांसद मोहिंदर सिंह केपी के निवास पर जाकर उनको जफ्फी डाली, जिससे केपी के चेहरे पर मुस्कान लौट आई। कैप्टन ने केपी की कोठी में उनके साथ बंद कमरे में 10 मिनट बैठक की और केपी को साथ गाड़ी में बिठाकर चौधरी संतोख सिंह का नामांकन दाखिल कराने के लिए निकल गए। इससे चौधरी संतोख सिंह ने राहत की सांस ली है, क्योंकि पूर्व सांसद मोहिंदर सिंह केपी उनके लिए काफी खतरा बने थे। सुबह से ही केपी की कोठी पर भीड़ लगनी शुरू हो गई थी, उनके समर्थक मिलने के लिए पहुंचने लगे थे।
कैप्टन अमरिंदर सिंह को सुबह साढ़े 10 बजे केपी के निवास पर पहुंचना था, लेकिन कैप्टन करीब 12 बजे केपी के निवास पर पहुंचे। वहां कांग्रेस के महासचिव मनोज अरोड़ा के अलावा पूर्व विधायक जगबीर बराड़ व कैप्टन के पूर्व ओएसडी सोनू ढेसी समेत कई सीनियर नेता पहुंच चुके थे। कैप्टन के साथ पूर्व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा के अलावा रवीन ठुकराल केपी की कोठी पर पहुंचे तो नेताओं ने मोहिंदर सिंह केपी जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। कैप्टन अमरिंदर सिंह जिंदाबाद के नारे भी लगाए गए। कैप्टन वर्करों से मिले बिना सीधा केपी की कोठी में चले गए। जहां पर विधायक राणा गुरजीत सिंह भी थे।
केपी के ड्राइंग रूम में नेताओं के साथ कैप्टन ने बातचीत की और बाद में केपी व उनके परिवार के साथ अलग से वार्ता की। इसके बाद केपी व कैप्टन हंसते हुए ड्राइंग रूम से निकले और कैप्टन सीधा केपी का हाथ पकड़कर उन्हें अपनी गाड़ी में बैठाकर लेकर गए। केपी ने टिकट न मिलने से विद्रोह का बिगुल फूंक रखा था और यहां तक की महापंचायत भी बुला ली थी, लेकिन 15 अप्रैल को केपी को सीधा दिल्ली बुला लिया गया। वहां पर केपी की मुलाकात अहमद पटेल के अलावा आशा कुमारी व अन्य नेताओं से हुई। इसके बाद केपी का रुख नर्म हो गया था। सोमवार को चौधरी संतोख सिंह ने नामांकन दाखिल करना था। लेकिन कैप्टन ने केपी को जफ्फी डालकर चौधरी केपी के बीच चल रही खटास का पटापेक्ष कर दिया है।