मुख्य संसदीय सचिव डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बादल सरकार के खिलाफ अपना मरणव्रत शुरू कर दिया। उन्होंने ऐलान किया कि जब तक उनके विधानसभा क्षेत्र को घोषित फंड नहीं दिए जाते, तब तक वह मरणव्रत पर बैठी रहेंगी।
शनिवार को भारी बारिश के दौरान डॉ. सिद्धू ने कहा कि उनके पति नवजोत सिंह सिद्धू भी जल्दी ही उनके साथ इस आंदोलन में शामिल होंगे। डॉ. सिद्धू ने कहा कि उन्हें अपनी सरकार और बादलों पर कोई भरोसा नहीं है, इसीलिए उन्होंने मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के आश्वासन के बावजूद आंदोलन करने का मन बनाया है।
पिछले कई साल से उन्हें सिर्फ और सिर्फ आश्वासन ही दिए जा रहे हैं। कुछ साल पहले उनके पति भी अनशन पर बैठने लगे थे, तब सरकार और सीएम ने वायदा किया कि उनके प्रोजेक्ट शुरू होंगे। इस पर उनके पति ने आंदोलन का रास्ता छोड़ दिया था। आज तक वह प्रोजेक्ट पंजाब सरकार ने शुरू नहीं करवाए, ऐसे में अब मुझे अपनी ही सरकार पर भरोसा नहीं रहा।
10 करोड़ के प्रोजेक्ट का ऐलान, लेकिन जारी नहीं हुए
सिद्धू ने बताया कि लोकल बॉडी की तरफ से जो पांच करोड़ रुपये मिलने थे, उसके टेंडर की फाइल उन्हें मिल चुकी है लेकिन सीएम की तरफ से मिलने वाले पांच करोड़ रुपये की उन्हें कोई खबर नहीं है। इसलिए वह अपने निर्णय पर अटल हैं।
सरकार ने उनके हलके के विकास के लिए 10 करोड़ रुपये के टेंडर जारी कराने का ऐलान किया था, लेकिन वह अभी तक जारी नहीं हुए हैं। उन्होंने मांग की कि उनके क्षेत्र के विकास के लिए चार सौ करोड़ रुपये जारी किए जाएं।
उन्होंने पंजाब सरकार को अल्टीमेटम दिया था कि अगर 15 अगस्त तक उनके हलके के विकास के कामों के 10 करोड़ रुपये के टेंडर जारी न हुए तो वह भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगी।
बारिश में भी बैठी रही अनशन पर
भंडारी पुल पर डॉ. सिद्धू भारी बारिश के बीच भी पंडाल के नीचे बैठी रही। उन्होंने कहा कि उन्हें लोगों का इतना प्यार मिला कि उन्हें भूख ही नहीं लगी।
डॉ. सिद्धू ने बताया कि उनकी मुख्यमंत्री कार्यालय में बात हुई थी, वहां से भी पांच करोड़ के विकास के कार्यों की फाइल साइन होकर चली गई है। इससे ज्यादा अभी उस फंड को लेकर उनके पास कोई जानकारी नहीं है।
मुख्य सचिव की ओर से भी फोन पर उनको कहा गया था कि उनके पांच करोड़ के टेंडरों वाली फाइल पास हो गई है। जल्दी ही टेंडर लग जाएंगे। फिर भी उनको पंजाब सरकार पर विश्वास नही है, क्योंकि सरकार उनके पति को भी एक बार ऐसे ही धोखा दे चुकी है। इसलिए आंदोलन का रास्ता ही उनके लिए सही है।