डेरामुखी रामरहीम को सजा सुनाते समय अदालत ने गंभीर टिप्पणी की है। जज जगदीप सिंह ने फैसले में लिखा है कि एक पत्रकार की हत्या घिनौना अपराध है। लोकतंत्र के स्तंभ को कुचलने की किसी को इजाजत नहीं दी जा सकती। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या कोल्ड ब्लड मर्डर है, जो सिरसा में ‘पूरा सच’ सांध्य कालीन समाचार पत्र निकालते थे।
सच को दबाने के लिए एक शक्तिशाली व्यक्ति ने हत्या करवाई। यहां तक की गलत न्यूज मानते हुए कहीं शिकायत तक नहीं की। यह अपराध गंभीर है, लेकिन उस अति गंभीर अपराध की श्रेणी में नहीं आता, जिसमें फांसी की सजा दी जाए। ऐसे व्यक्ति और उसके अंध भक्तों को सजा देते समय अगर नरमी बरती गई तो समाज में गलत संदेश जाएगा।
पत्रकार कई बार दोराहे पर खड़ा होता है। वह चाहे तो सच को अनदेखा कर सकता है, लेकिन जब सच उजागर करता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। यहां तक की जान तक जा सकती है। पत्रकारिता गंभीर पेशा है, इसमें खतरा ज्यादा और प्रोत्साहन कम है। एक आदर्शवादी पत्रकार और निर्दोष नागरिक की आवाज दबाई गई। लोकतंत्र में भीड़तंत्र और हिंसा का कोई स्थान नहीं है। यहां व्यवस्था कानून और संविधान के अनुसार चलती हैं।