सन टेक सिटी मामले में पंजाब पुलिस की जांच से हाईकोर्ट असंतुष्ट, सीबीआई जांच की मांग पर नोटिस
-याची ने आरोपियों की जानबूझ कर गिरफ्तारी न करने का लगाया है आरोप, सीबीआई जांच की मांग
-भूमि मालिकों की सहमति के बगैर बिल्डर के सीएलयू करवाने का है मामला
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। भूमि मालिकों की सहमति के बगैर भूमि का सीएलयू करवाने के मामले में एफआईआर के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सीबीआई जांच की मांग पर नोटिस जारी करते हुए सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इससे पहले सिंगल बेंच ने भूमि मालिकों की याचिका 1 लाख रुपये जुर्माना लगाकर खारिज कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश को रद्द करते हुए खंडपीठ को याचिका पर सुनवाई का आदेश दिया था।
याचिका दाखिल करते हुए बहादुर सिंह व अन्य ने एडवोकेट चरणपाल सिंह के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया था कि सन टेक बिल्डर्स ने एयरपोर्ट रोड पर सन टेक सिटी के लिए 108 एकड़ भूमि का सीएलयू करवाया था। इसमें से बिल्डर के पास केवल 56 एकड़ भूमि थी जबकि प्रोजेक्ट के लिए उस समय कम से कम 100 एकड़ भूमि जरूरी थी। इसके बाद याचिकाकर्ताओं की मंजूरी लिए बगैर उनकी 52 एकड़ भूमि को प्रोजेक्ट का हिस्सा बताते हुए सीएलयू और लाइसेंस ले लिया गया। याची पक्ष ने बताया कि जब इस बारे में शिकायत दी गई तो पुलिस का रवैया भी ढुल मुल रहा। पुलिस ने मंजूरी से जुड़े पत्र तक बिल्डर से प्राप्त नहीं किए। याची ने कहा कि इस मामले में अधिकारियों की मिलीभगत से काम हुआ और पूरे प्रोजेक्ट में भारी अनियमितता थी।
याचिका गत वर्ष हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए पहुंची थी और सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए याचिका को खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ भूमि मालिक सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश को खारिज कर दिया और जुर्माना राशि भी रद्द कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामला वापस हाईकोर्ट भेजते हुए खंडपीठ को इसकी सुनवाई का आदेश दिया था।
इस मामले में रेरा ने हाईकोर्ट को बताया है कि पंजीकरण के दौरान आवश्यक प्रावधानों का पालन नहीं हुआ है और ऐसे में रेरा बिल्डर का लाइसेंस रद्द करने जा रहा है। अन्य विभागों द्वारा भी इसी तरह की दलीलें दी गई। इसी बीच पुलिस ने बताया की वारंट जारी होने के बावजूद अभी तक आरोपियों का कोई सुराग नहीं मिला है। इस दौरान याची पक्ष ने बताया कि आरोपी गमाडा की सीनियर टाउन प्लानर के अनुसार एक आरोपी अजय सहगल 2 जुलाई को गमाडा के जारी नोटिस के जवाब में पक्ष रखने के लिए पहुंचा था। इसका संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने अब सीबीआई जांच की मांग को लेकर दाखिल अर्जी पर नोटिस जारी कर सभी पक्षों से जवाब मांगा है। आरोपियों के वकील ने कहा है कि भूमि मालिकों के हिस्से को मंजूर प्लान से हटाने का उन्होंने निवेदन दिया है।
यह दी गईं दलीलें
-2018 में कंपनी ने लाइसेंस लिया था, लाइसेंस की शर्त के अनुसार बिल्डर को 5 साल के भीतर 100 प्रतिशत भूमि पर कब्जा लेना अनिवार्य होता है जो अभी तक नहीं लिया गया
-जब तक भूमि का कब्जा नहीं लिया जाता तब तक कोई खरीद या बिक्री नहीं हो सकती है
-याचिकाकर्ताओं की मंजूरी लेने की बात कही जा रही है लेकिन न तो ऐसा कोई पत्र दिखाया गया और न ही किसी भुगतान की कोई रसीद मौजूद है