चंडीगढ़ में निजी स्कूलों की ओर से मनमानी फीस वसूली और दुकानदारों से साठगांठ कर किताबों व ड्रेसेज़ में मुनाफाखोरी पर नजर रखने के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक रेगुलेटरी मेकैनिज्म न बनाने पर अवमानना याचिका की सुनवाई जस्टिस राजेश बिंदल ने स्थगित कर दी है।
बेंच ने याचिकाकर्ता पंकज चांदगोठिया को कहा है कि जो स्कूल नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, उन्हें प्रतिवादी बनाया जाना जरूरी है, लिहाजा याचिका में ऐसे स्कूलों को प्रतिवादी बनाया जाए। बेंच ने कहा है कि हाईकोर्ट ने पहले ही पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को रेगुलेटरी मैकेनिज्म स्थापित करने की छूट दे रखी है कि वह ऐसी अथॉरिटी की संभावना तलाश सकते हैं, जिससे यह पता लगाया जाए कि क्या निजी पब्लिशर्स की पुस्तकों की कीमतों और निजी स्कूलों की ओर से एनसीईआरटी की पुस्तकें लगाने की बाध्यता की परख की जा सके। इस पुराने आदेश को दोहराते हुए बेंच ने कहा है कि ऐसे में प्रतीत हो रहा है कि निजी स्कूल प्रशासन को सहयोग नहीं दे रहे हैं, लिहाजा इस मामले में ऐसे स्कूलों को प्रतिवादी बनाया जाना जरूरी है।
शहर के प्राइवेट स्कूलों की मनमानी और मुनाफाखोरी का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दायर कर दी गई थी। इसमें मानव संसाधन विकास मंत्रालय सहित चंडीगढ़ प्रशासन और चंडीगढ़ शिक्षा विभाग को भी पक्ष बनाया गया था। कहा था कि हाईकोर्ट ने इस मामले में तीन साल पहले चंडीगढ़ प्रशासन को रेगुलेटरी मैकेनिज्म बनाने का आदेश दिया था। इसके बावजूद प्रशासन ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है।
लिहाजा, हाईकोर्ट के आदेश को लागू करने के कारण यह अवमानना का मामला बनता है। याचिका में शिक्षा विभाग पर कार्यवाही किए जाने की मांग की थी। साथ ही मांग है कि हाईकोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए दिल्ली एजुकेशन एक्ट की तर्ज पर ऐसा कानून चंडीगढ़ में भी जल्द बनाया जाए, जिससे छात्रों और अभिभावकों को राहत मिल सके।