चंडीगढ़ सदन की बैठक में भाजपा का साथ देकर लॉयंस कंपनी का एजेंडा पास कराने वाले आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने गुरुवार को पार्टी के प्रदेश संयोजक प्रेम गर्ग को अपना जवाब सौंप दिया। पार्षदों ने कहा है कि हम अरविंद केजरीवाल की टीम के सच्चे सिपाही हैं, सदन की बैठक में असमंजस के कारण भाजपा के समर्थन में हाथ उठ गए। जवाब मिलने के बाद प्रेम गर्ग और आप के चंडीगढ़ प्रभारी जरनैल सिंह व नेता प्रतिपक्ष योगेश ढींगरा के बीच काफी देर तक बैठक चली। अंत में तय हुआ कि दिल्ली हाईकमान ही तय करेगा कि पार्षदों के खिलाफ कोई कार्रवाई करनी है या नहीं।
सदन की बैठक में बिना बताए अनुपस्थित रहने वालीं पार्षद अंजू कत्याल और दमनप्रीत बादल ने भी गुरुवार को अपना जवाब पार्टी को सौंप दिया। अंजू कत्याल ने बताया कि उनके घर में शादी थी लेकिन उनसे भूल यह हुई कि पार्टी के पदाधिकारियों को सूचित नहीं किया। इसका वह भविष्य में ध्यान रखेंगी। वहीं दमनप्रीत बादल ने बताया कि उनके घर में किसी का देहांत हो गया था। इस कारण वह जानकारी नहीं दे सके। भविष्य में वह भी पार्टी के अनुशासन का ध्यान रखेंगे।
आप ने जैसे ही अपने पार्षदों को नोटिस जारी किया भाजपा और कांग्रेस में भी सक्रियता बढ़ गई। किसी भी स्तर पर आप में फूट आती तो भाजपा इसका फायदा जरूर उठाती। क्योंकि वर्तमान में भाजपा के पास 13 पार्षद हैं, एक वोट सांसद का मिलाकर उनके 14 हो जाते हैं। वहीं आप के भी 14 पार्षद हैं, इधर कांग्रेस के सात पार्षद हैं। अपना मेयर बनाने में भी भाजपा को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। वहीं मार्च माह की सदन की बैठक में भी आप ने कांग्रेस की मदद से सदन में एक भी एजेंडा पास नहीं होने दिया था। ऐसे में आप में फूटन का सपना हर राजनीति पार्टी देख रही थी।
सदन की बैठक में आप का अनुशासन कम ही देखने को मिला है। आप पार्षद प्रेमलता ने एक बैठक में राष्ट्रगान के दौरान विरोध स्वरूप पोस्टर दिखाकर हाथ ऊपर कर लिया था। अगली बैठक में भाजपा ने इसका विरोध किया तो उन्होंने सदन से माफी मांगी। उसके बाद योगेश ढींगरा ने पार्कों को आरडब्ल्यूए को देने का समर्थन किया, तब भी प्रेमलता ने विरोध करते हुए कहा कि आरडब्ल्यूए पार्कों को बर्बाद कर रहे हैं। वह केवल राजनीतिक रोटी सेकते हैं।
आप की नजर अब हिमाचल प्रदेश चुनाव पर है। पार्टी के किसी भी नेता पर कार्रवाई हुई तो वहां असर पड़ेगा। ऐसे में मामले को अंदर ही निपटाने के उद्देश्य से जरनैल सिंह खुद चंडीगढ़ आए और पार्षदों को चेतावनी देकर चले गए क्योंकि कार्रवाई होने पर पार्षदों के टूटने का भी डर है और हिमाचल में चुनाव पर भी असर पड़ सकता है इसलिए पार्टी भी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।