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आंखों में धूल झोंककर मलाईदार पदों पर की जा रही अफसरों की पुनर्नियुक्ति, सरकार को भनक तक नहीं

Tue, 25 Dec 2018 11:07 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
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जॉब - फोटो : source
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सरकार की आंखों में धूल झोंककर अफसरों द्वारा अपने चहेतों को मलाईदार पदों पर पुनर्नियुक्ति दी जा रही है, और सरकार को इसकी भनक तक नहीं। ऐसा हो रहा है हरियाणा में, जहां बीजेपी की सरकार है। यहां विभिन्न विभागों में अफसर अपने स्तर पर ही अपने चहेतों को पुनर्नियुक्ति दे रहे हैं और सरकार को इस बारे में भनक भी नहीं लगती।
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इसको लेकर हरियाणा के मुख्य सचिव ने गंभीरता दिखाई है। हरियाणा के सभी प्रशासकीय सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे मामले अब मंत्रिपरिषद के सम्मुख प्रस्तुत किए जाएंगे और वहां से अनुमोदन के बाद ही इन पर पुनर्नियुक्ति होगी। हरियाणा में पिछले कुछ सालों से एक अजीब प्रचलन चल रहा है।

विभिन्न विभागों में जो कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं, उनमें से अपने चहेतों को विभाग के आला अधिकारी पुनर्नियुक्ति देकर फिर से विभाग में तैनात कर देते हैं। हालांकि इन कर्मचारियों को कांट्रैक्ट बेस पर रखा जाता है, लेकिन ये कर्मचारी व अफसर महत्वपूर्ण पदों पर काम करते हैं। ऐसी कई शिकायतें सीएमओ तक पहुंची है, जिसमें पुनर्नियुक्त कर्मचारियों व अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किया गए हैं।
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बिना वेतन-भत्तों के काम कर रहे कई पुनर्नियुक्ति अफसर-कर्मी

हरियाणा के सामान्य प्रशासन विभाग ने भी जारी अपने सर्कुलर में इस बात का खुलासा किया है कि आला अधिकारी अपने विभाग में कर्मचारी व अफसर की पुनर्नियुक्ति के बार सेक्शन लेते हैं। हैरत की बात यह कि कई मामले तो ऐसे होते हैं, जिसकी सेक्शन तब ली जाती है, जब पुनर्नियुक्ति की अवधि खत्म होने वाली होती है। इससे बड़ी हैरानी की बात यह कि पुनर्नियुक्ति के बाद कई कर्मचारी व अधिकारी तो बिना वेतन-भत्तों के ही काम कर रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ऐसे कर्मचारियों का गुजर-बसर कैसे चलता होगा?

मंत्रिपरिषद में रखने होंगे सभी पुनर्नियुक्ति मामले
विभागों में चल रहे पुनर्नियुक्ति के इस खेल पर लगाम कसने के लिए सभी विभागों के प्रशासकीय सचिवों को मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने विभागों में पुनर्नियुक्ति के सभी मामलों को मंत्री परिषद की आगामी दो बैठकों के सम्मुख प्रस्तुत करेंगे। मंत्रिपरिषद के सम्मुख जो केस आएंगे, उसी पर विचार होगा। अन्य पुनर्नियुक्तियां सरकारी स्तर पर विचाराधीन नहीं होंगी। प्रशासकीय सचिवों को ये भी साफ कर दिया गया है कि भविष्य में पुनर्नियुक्ति से पहले मंत्रिपरिषद का अनुमोदन अनिवार्य होगा।
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