पीजीआई में भाई-भतीजावाद का खेल ऊपर से नीचे तक किस कदर फैला है, इसकी गवाह विजिलेंस को भेजे जाने वाली शिकायतें हैं। फर्क इतना है कि निचले स्तर के मामलों में शोर मचने पर कार्रवाई कर दी जाती है और बड़े मामलों में चुप्पी साध ली जाती है। इसका एक उदाहरण पिछले साल 30 जून को हुई लोवर डिवीजन क्लर्क (एलडीसी) की परीक्षा है।
इस परीक्षा में रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत एक अधिकारी की बेटी व दूसरे एडमिनिस्ट्रेटिव अधिकारी की बेटी व दामाद ने भी हिस्सा लिया था। इसके बाद यह आरोप लगा कि रिश्तेदारों के लिए पेपर लीक कर दिया गया था। पीजीआई रिटायर्ड इम्प्लायज वेलफेयर की ओर से इसकी शिकायत चीफ विजिलेंस अधिकारी और पीजीआई डायरेक्टर से की गई।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि प्रश्नपत्र रोल नंबर के अनुसार होना एक अनोखी बात थी, जिससे यह शक होता है कि कुछ लोगों के लिए विशेष प्रश्नपत्र हो सकते है। शिकायत मिलने के बाद रिजल्ट पर रोक लगा दी गई।
हालांकि परीक्षा में कई अन्य अनियमितताएं भी थीं। इस मामले में कुछ लोग सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) भी गए। एलडीसी के लिए कुल 71 पद थे। इसके लिए सैकड़ों लोगों ने परीक्षा दी थी।
एक-एक परिवार के चार-चार सदस्य कर रहे हैं काम
पीजीआई में डॉक्टर के अलावा जो अन्य स्टाफ काम करता है, उनके भी कई रिश्तेदार पीजीआई में कार्यरत हैं। एक फैमिली के चार सदस्य पीजीआई में काम कर रहे हैं। इनमें दो भाई एक ही ब्लॉक में हैं, जबकि उनकी बहन व एक अन्य सदस्य दूसरे विभाग में नियुक्त हैं।
इसी तरह से इंजीनियरिंग विंग में कार्यरत एक परिवार के तीन से चार सदस्य काम कर रहे हैं। पीजीआई के सूत्रों का कहना है कि जिनके संपर्क कैरो ब्लॉक के अधिकारियों से होते हैं, उनके रिश्तेदारों की पीजीआई में नियुक्ति होना आम बात है। कैरो ब्लॉक पीजीआई का एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक ह्रै।
जिन्होंने तैयारी की थी उनके साथ धोखा
लोवर डिवीजन क्लर्क के लिए परीक्षा देने वाले अनिल ने बताया कि उसने जमकर तैयारी की थी। एग्जाम भी अच्छा हुआ था, लेकिन जब सूचना मिली कि परीक्षा में कुछ धांधली हुई है तो मूड ऑफ हो गया, लेकिन फिर भी लग रहा था कि रिजल्ट जल्दी आउट हो जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। पूरे नौ महीने बीत गए लेकिन अब तक कोई परिणाम नहीं आया। कुछ साथियों ने भी एग्जाम दिए थे, जो गड़बड़ी की सूचना के बाद से निराश हैं।