चंडीगढ़। चंडीगढ़ का प्रॉपर्टी बाजार इन दिनों तेज उछाल के साथ असंतुलन के दौर से गुजर रहा है। शहर में कॉरपोरेट घरानों की बढ़ती एंट्री और प्रशासन की ओर से कलेक्टर रेट में की गई बढ़ोतरी ने संपत्तियों की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। खासतौर पर 4 से 6 कनाल की रेजिडेंशियल कोठियों में 100 से 120 करोड़ रुपये तक के निवेश हो रहे हैं जिसका सीधा असर छोटी और मध्यम श्रेणी की प्रॉपर्टी पर भी देखने को मिल रहा है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी डील्स के चलते छोटी प्रॉपर्टियों का मूल्यांकन भी उसी आधार पर किया जा रहा है जिससे आम खरीदार के लिए घर खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। प्रॉपर्टी कारोबारियों के अनुसार रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी में कलेक्टर रेट बढ़ाने की जरूरत नहीं थी जबकि कॉमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेक्टर में पहले से ही कलेक्टर रेट ज्यादा है और कई जगह मार्केट रेट इससे 40 से 50 प्रतिशत तक कम है। इस असंतुलन का असर निवेश पर भी पड़ रहा है। उद्योगपति नवीन मंगलानी का कहना है कि ऊंचे कलेक्टर रेट और कम एफएआर के कारण निवेशक पंचकूला और मोहाली की ओर रुख कर रहे हैं। निवेशकों का कहना है कि जब तक कलेक्टर रेट में कमी, एफएआर में बढ़ोतरी और लीज होल्ड को फ्री होल्ड में बदलने जैसे कदम नहीं उठाए जाएंगे तब तक इंडस्ट्रियल सेक्टर की ग्रोथ प्रभावित रहेगी।
प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में प्रॉपर्टी नीलामी के जरिए 13 संपत्तियों से 145.67 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया गया जो रिजर्व प्राइस से 117 प्रतिशत अधिक है। इसमें 12 रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी से 125.30 करोड़ और एक कॉमर्शियल साइट से 20.37 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। वर्ष 2021 से 2025 के बीच प्रशासन ने कुल 230 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया है। साथ ही 2025 में प्रॉपर्टी म्यूटेशन के मामलों में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस वर्ष कुल 2,835 म्यूटेशन हुए, जिनमें 1,860 रेजिडेंशियल, 838 कॉमर्शियल और 137 इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी शामिल हैं। यह आंकड़े बाजार में बढ़ती गतिविधियों और निवेशकों की रुचि को दर्शाते हैं।
कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी की जरूरत नहीं थी। इससे खरीदारों पर अतिरिक्त टैक्स और शुल्क का बोझ बढ़ेगा और बाजार की गति धीमी हो सकती है। -सुभाष शर्मा, प्रॉपर्टी कंसल्टेंट
कॉरपोरेट निवेश से बड़ी प्रॉपर्टी के रेट तेजी से बढ़े हैं लेकिन कॉमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेक्टर में कलेक्टर रेट ज्यादा होने से निवेश बाहर शिफ्ट हो रहा है। -विक्रम चोपड़ा, प्रॉपर्टी कंसल्टेंट