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हम बहुत पीछे हैं...कोरोना से लड़ने को सिर्फ 21 वेंटिलेटर, चंडीगढ़ पर निर्भर करते हैं पंचकूला-मोहाली

Fri, 27 Mar 2020 01:36 PM IST
खुशबू गोयल दीपक शाही, जीरकपुर
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वेंटिलेटर
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विश्व में कोरोना वायरस लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। बचाव के लिए केंद्र सरकार ने पूरे देश में लॉकडाउन किया हुआ है। लेकिन सवाल ये है कि क्या जिला अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएं कोरोना से पीड़ित मरीजों को संभालने के लिए तैयार हैं... तो आपकी जानकारी के लिए बता दें जी बिल्कुल नहीं।
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मोहाली, पंचकूला और डेराबस्सी के तीनों सिविल अस्पताल या तो प्राइवेट अस्पतालों पर या फिर चंडीगढ़ के तीनों बड़े सरकारी अस्पतालों पर ही निर्भर हैं। बाकी उक्त तीनों शहरों के अस्पतालों में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है। भगवान न करे कि ऐसा हो, लेकिन अगर कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई तो ट्राइसिटी और आसपास के शहरों में स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा जाएंगी। क्योंकि यहां के अस्पताल पहले से ही चंडीगढ़ के पीजीआई, जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 के वेंटिलेटरों पर निर्भर हैं।  

वैसे चंडीगढ़ के तीनों बड़े सरकारी अस्पतालों में इस समय करीब 331 वेंटिलेटर हैं। इनमें से जीएमसीएच सेक्टर-32 में 6 वेंटिलेटर कोरोना मरीजों के लिए रिजर्व रखे हुए हैं। वहीं, पीजीआई में 9 और जीएमएसएच सेक्टर-16 में 6 वेंटिलेटर रिजर्व रखे हुए हैं। इसके अलावा इन अस्पतालों में जो बाकी वेंटिलेटर हैं, वे अदर पेशेंट्स के लिए पहले से मरीजों को दिए जा चुके हैं।
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चंडीगढ़ के तीनों अस्पतालों कुल 331 वेंटिलेटर
पीजीआई में 250 प्लस
जीएमसीएच-32 में 75
जीएमएसएच-16 में 6

पंचकूला में आईसीयू का सेटअप तैयार, 6 वेंटिलेटर मिलने की उम्मीद

सेक्टर-6 सिविल अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए 6 बेड का इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) तैयार किया गया है। यहां मशीन भी लग चुकी है, इसकी शुरुआत जनवरी, 2020 में होने की उम्मीद थी। लेकिन हो नहीं पाई। सिविल अस्पताल की पीएमओ डॉ. सरिता यादव ने बताया कि आईसीयू का सेटअप तैयार किया जा चुका है और मशीनें लगा दी गईं हैं, अब बस वेंटिलेटर का इंतजार है।

इसकी डिमांड भेजी जा चुकी है। करीब 6 वेंटिलेटर पंचकूला को मिलने की उम्मीद है। बता दें कि सिविल अस्पताल में करीब 4 हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसमें इमरजेंसी की ओपीडी में 400 से ज्यादा मरीज आते हैं। इनमें से करीब 10 मरीजों को आईसीयू वार्ड की जरूरत पड़ती है। हालांकि पूरे प्रदेश में राज्य के अस्पतालों में 210 नए वेंटिलेटर लगाए जाने की बात हरियाणा के सेहत मंत्री अनिल विज ने कही थी।

मोहाली के सिविल अस्पताल में नहीं वेंटिलेटर, प्राइवेट अस्पतालों पर निर्भर

जिले के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है। यहां के मरीज प्राइवेट अस्पताल या फिर चंडीगढ़ और पीजीआई पर निर्भर हैं। मोहाली के डीसी गिरीश दियालन ने बताया कि निजी अस्पतालों से टाइअप किया गया है। क्योंकि मोहाली मेडिकल कॉलेज बन रहा है, इसलिए कुछ साधनों जैसे की वेंटिलेटर आदि की कमी है।

अभी तक चीन समेत दुनियाभर में कोरोना के जो मरीज मिले हैं, उनमें से 5 फीसदी को सांस लेने से जुड़ी गंभीर समस्याएं होती हैं, जिसके चलते उनका इलाज आईसीयू में ही किया जा सकता है। भारत में हर दिन कोरोना संक्रमित नए मामले मिलने की दर बढ़ रही है। डॉक्टर मानते हैं कि यह वृद्धि संकेत है कि देश में कोरोना का संक्रमण तीसरे चरण पर पहुंच रहा है, जहां संक्रमण समुदाय में फैलने लगता है। कोरोना संक्रमण दर में ऐसी ही वृद्धि इटली और ईरान में देखने को मिली थी। इसके बाद वहां के अस्पतालों में वेंटिलेटर पर इलाज की जरुरत वाले मरीजों का भार बढ़ गया और स्थिति अनियंत्रित हो गई।

पूरे भारत में सिर्फ 40 हजार वेंटिलेटर
गौरतलब है कि वेंटिलेटर बनाने के लिए सरकार को मोटा बजट खर्चना होगा, क्योंकि एक वेंटिलेटर की कीमत करीब 8-10 लाख रुपये होती है। अभी तक भारत में करीब 40 हजार वेटिंलेटर हैं। अगर कोराना भारत में पूरी महामारी की तरह फैल गया तो इतने वेंटिलेटर यहां नहीं हैं कि कोरोना से पीड़ित मरीजों का उपचार किया जा सके।
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हर व्यक्ति की जिम्मेदारी

- हाल ही में विदेश यात्रा की है, तो बिना कुछ सोचे समझे अपने आप को तुरंत आइसोलेट कर लीजिए।
- अगर आपको सर्दी- खांसी या बुखार है तो तुरंत अपन चेकअप करवाएं।
- अगर कोरोना का संक्रमण है तो किसी दूसरे के संपर्क में कतई न आएं।
- आइसोलेशन के दौरान तबियत बिगड़ती है तो प्रशासन के हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें।
- कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए जरूरी है कि आप अपनी आदतों में बदलाव लाएं
- हाथ को बार-बार धोएं, चेहरे को न छुएं। बाहर बिलकुल न निकलें। ज्यादा लोगों से नहीं मिलें।
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