डीसीपी गुरमीत सिंह कोरोना को एक जंग की तरह ले रहे हैं। वे रोजाना 18 घंटे फील्ड में काम कर रहे हैं। दिन भर फोन की घंटियां बज रही है, कौन कहां से परेशान है, क्या जरूरत है, उसका फोन पर समाधान तो करते हैं, साथ ही उन 2 हजार एनआरआई को भी खोजकर अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं जो विदेशों से लौटे हैं।
गुरमीत सिंह रात को करीब 12 से 1 बजे के बीच घर जाते हैं और तब भी फोर्स की ब्रीफिंग करते हैं। सुबह छह बजे तैयार होकर फील्ड में आ जाते हैं। पिछले 24 घंटे में वह शहर के झुग्गी झोंपड़ी वालों की लंबी सूची तैयार कर रहे हैं ताकि उनको तीनों वक्त का खाना और पानी के अलावा दूध मुहैया करवाया जा सके।
बुधवार शाम तक वे ऐसे 1300 लोगों की सूची तैयार करवा चुके थे, जिनकी जेब में एक रुपया भी नहीं था। इन परिवारों तक खाना कौन पहुंचाएगा, क्या योजना है, इस पर गुरमीत सिंह बताते हैं कि कुछ संस्थाओं से उनकी मीटिंग हो चुकी है, वह पैक्ड फूड तीनों वक्त तक इन परिवारों तक पहुंचाएंगे। शहर में दूध की सप्लाई कम न हो और पेट्रोल व डीजल के अलावा अस्पताल की सुरक्षा का पूरा जिम्मा गुरमीत सिंह के कंधों पर है।
रोजाना 300 से अधिक कॉल आ रही
गुरमीत सिंह कहते हैं कि हमारे निचले स्तर के कर्मचारी भी इंसान है, हम अगर सारा घर छोड़कर फील्ड में दौड़ते हैं तो मुलाजिमों में एक ऊर्जा का संचार होता है। वह बराबर दौड़ते हैं, उनका मनोबल नहीं गिरने देना है। इसलिए हर कदम पर उनकी पीठ थपथपा रहा हूं कि यह एक जंग है। कई बार तो ऐसा वक्त आया कि एनआरआई को देखकर कुछ मुलाजिमों ने कदम पीछे खींचे लेकिन खुद एसीपी को लेकर मैदान में उतरे तो उनका हौसला भी बढ़ गया।
दिन भर फोन की घंटियां बजती हैं, लोगों को जरूरी सामान समय पर पहुंचे, उनको रुकावट न आए, इसलिए एंड्रायड फोन के साथ साथ एक हाई बैटरी वाला छोटा फोन ले लिया है, रोजाना 300 से अधिक कॉल आ रही है और इतनी ही आगे जा रही हैं। गुरमीत सिंह कहते हैं कि पुलिस के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी हैं। हमें लोगों को घरों के अंदर भी रखना है और उनके लिए सामान भी मुहैया करवाना है।
उनको कोरोना वायरस के खतरे के बारे में जागरूक भी करवाना है। मुलाजिमों की सेहत भी देखनी है, उनसे काम भी लेना है। लोग प्यार से घरों में नहीं घुस रहे। कुछ सख्ती भी इस्तेमाल करते हैं लेकिन उतनी कि लोगों को कर्फ्यू की समझ आ जाए। हमने कई इलाकों में 100 फीसदी लोगों को घरों के अंदर भेज दिया है। कुछ संकरे इलाके हैं उन पर अगले चरण में सख्ती की योजना है।
गाड़ी में ही ब्रेकफास्ट और पाठ...
गुरमीत सिंह रोजाना वाहेगुरु का पाठ करते हैं। वह कहते हैं कि मेरा ब्रेकफास्ट इन दिनों गाड़ी में ही हो जाता है। पाठ भी गाड़ी में बैठकर कर रहा हूं। पाठ करना मेरी दिनचर्या की शुरुआत का हिस्सा है, इसलिए सुबह गाड़ी में बैठते ही पाठ करता हूं। सरबत के भले की अरदास भी रोजाना करता हूं।