हरियाणा में सब्जी उत्पादकों, सब्जियों की पौध उगाने वाले किसानों को कोरोना महामारी ने बड़ी चपत लगाई है। सब्जियों के मार्केट न पहुंचने और किसानों की पौध न बिकने से लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान है। स्थानीय मंडियों में किसानों को बहुत ही कम दाम मिल रहे हैं, जबकि दिल्ली, सहारनपुर व अंबाला मंडी में सब्जियां नहीं पहुंच पा रहीं। आढ़ती भी किसानों से कम ही सब्जी खरीद रहे हैं, चूंकि मार्केट में थोक व रिटेल के ग्राहक ही नहीं हैं। अधिकतर सब्जी विक्रेताओं की दुकानें बंद हो चुकी हैं। जिससे आने वाले दिनों में सब्जियों के खेतों में ही खराब होने के आसार बन रहे हैं।
सब्जी की पौध लगाने वाले किसानों की नर्सरियां भरी पड़ी हैं, लेकिन पौध खरीदने के लिए पंजाब, उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश से किसान उपलब्ध नहीं है। कुछ बड़े किसानों ने 15-16 एकड़ में पौध लगाई है। जबकि छोटे किसानों ने 2 से 5 एकड़ में पौध उगाई हुई है। शाहबाद-मारकंडा निवासी किसान हरबीर तूर ने बताया कि उन्होंने दाढ़लू गांव में 15 से 20 एकड़ में टमाटर, घीया, खीरा व मिर्च की पौध लगाई थी। 15 से 20 लाख की पौध अभी खड़ी है। किसान खरीद के लिए नहीं आ पा रहा। टमाटर की पौध लगाने का समय मार्च में ही होता है। अप्रैल में यह नहीं लग पाएगी।
अभी उत्तम समय था, लेकिन कोरोना की वजह से बंद लागू हो गया। बारिश की वजह से सब्जी लगाने में किसान पहले ही लेट हो चुके थे। वह आशंकित हैं कि उनकी लाखों की पौध नर्सरी में ही खराब हो जाएगी। भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी व प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस ने कहा कि सरकार किसानों की सब्जियों को मंडी तक पहुंचाना व उचित दाम दिलाना भी सुनिश्चित करे। किसान पर कोरोना की मार पड़ी है। सब्जी उत्पादक किसानों को तुरंत आर्थिक मदद दी जाए।