विश्व में फैली कोरोना महामारी के चलते लगे लॉकडाउन से चंडीगढ़ की स्क्रू मैन्यूफैक्चरिंग उद्योग की कमर टूट गई है। एसोसिएशन ने कहा है कि लॉकडाउन के चलते लघु उद्यमी अपने कर्मचारियों को केवल मार्च माह का वेतन ही अदा कर पाए हैं। इस बार निर्णय लिया है कि वे आगामी माह के लिए अपने कर्मचारियों को केवल राशन के खर्च की राशि मुहैया करवा पाएंगे। चंडीगढ़ स्क्रू मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के महासचिव बीएस सैनी ने कहा कि स्क्रू इंडस्ट्री को बचाने के लिए सरकारी तुरंत मदद दे।
प्रति माह लाखों रुपए जीएसटी अदा करने वाले और रोजगार देने उद्यमों को तुरंत सहायता पहुंचाई जानी आवश्यक है। एसोसिएशन ने उद्यमियों की बैठक में चंडीगढ़ प्रशासन से मिली फैक्ट्री चलाने की छूट को दरकिनार करते हुए अपने कर्मचारियों एवं परिवार को किसी भी संकट में डालने से गुरेज किया है। बैठक में निर्णय लिया गया है कि वे प्रशासन द्वारा दी गई छूट का कोई फायदा नहीं ले पाएंगे क्योंकि आज फैक्ट्रियों को शुरू करना दोधारी तलवार बन चुका है। एक तरफ महामारी और दूसरी तरफ बाजार मे कोई मांग नहीं है। इन परिस्थितियों में कोई भी फैक्टरी चलाने का जोखिम नहीं ले पा रहा है।
बिजली बिल के फिक्स चार्ज माफ हों
बीएस सैनी ने कहा कि चंडीगढ़ के साथ लगते पंजाब हरियाणा और अन्य कई राज्यों ने बिजली के बिलों में लगने वाले फिक्स चार्ज में 6 माह की छूट प्रदान कर दी है। जबकि चंडीगढ़ प्रशासन ने एसोसिएशन द्वारा दिए गए ज्ञापन पर चुप्पी साध रखी है। और चंडीगढ़ में फिक्स चार्ज माफ नहीं किए गए हैं। जिसका मनोवैज्ञानिक और आर्थिक असर व्यापारियों पर पड़ा है।
किराए की मार...
सैनी ने बताया कि लगभग 75 प्रतिशत फैक्ट्रियां माहवार किराए के परिसरों में चल रही है। अपने खर्च के अतिरिक्त कर्मचारियों का वेतन, बिजली के बिल, जीएसटी इत्यादि अदा करने के बाद किराए का भारी-भरकम बोझ, उद्यमियों को उठाना पड़ रहा है। जो निश्चित तौर पर वह अब नहीं उठा पाएंगे।
बैंक ईएमआई व ब्याज...
उद्यमियों द्वारा व्यापार के लिए उठाए गए कर्ज की ईएमआई व ब्याज पर एक बैंक को छोड़कर किसी भी बैंक में कोई राहत प्रदान नहीं की है। बंद काम धंधों के आधार पर ईएमआई, ब्याज सभी बैंकों द्वारा बंद किया जाना चाहिए।
जीएसटी की दरें कम करे सरकार...
स्क्रू नट बोल्ट पर सरकार को 18% की दर से जीएसटी अदा किया जाता है। यह टैक्स माह की 20 तारीख तक पिछले माह में की गई बिक्री पर अदा किया जाता है। जबकि बिक्री किए गए माल का पैसा उद्यमियों को 30 से लेकर 90 दिन के बाद मिल पाता है। इस उत्पादन में 10 से 15 दिन अलग से लग जाते हैं। बैठक में जीएसटी की दरें कम करने की मांग की गई।
क्या कहते हैं उद्योगपति
चीन से होने वाले इंपोर्ट पर भारत सरकार को इपोर्ट ड्यूटी बढ़ानी चाहिए। चीन के कारण भारत में हो रहे नुकसान के कारण चीन से नॉन एसेंशियल इंपोर्ट बंद करनी चाहिए।
- जितेंद्र गोयल, मालिक अशोका स्टील
चंडीगढ़ में उद्योगों की ऐसी बदतर स्थिति कभी नहीं देखी। सरकार रिलीफ पैकेज दे। यदि रिलीफ पैकेज नहीं मिला तो उद्योग बर्बाद हो जाएंगे। मजदूरों का भी नुकसान होगा। बेरोजगारी भी बढ़ेगी।
- मनीष गर्ग, मालिक, आकाश फार्स्टन
चंडीगढ़ प्रशासन ने बिजली बिलों में लग रहे फिक्स चार्जेज को नहीं हटाया है जबकि बंद उद्योगों में भी व्यापारियों से उम्मीद की जा रही है कि वह कर्मचारियों को पूरी सैलरी सरकार को टैक्स के अतिरिक्त भी योगदान दे। जबकि सरकार ने फिक्स चार्ज माफ करने की पहल अभी तक नहीं की है।
- राकेश गुप्ता, मालिक अग्रवाल इंजीनियरिंग
घड़ी से लेकर हवाई जहाज के लिए स्क्रू बनते हैं यहां
साठ के दशक में चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया के साथ ही चंडीगढ़ में स्क्रू, नट, बोल्ट और रिवट इंडस्ट्री का जन्म हुआ है। लुधियाना के साइकिल उद्योग में लगने वाले रिवट, स्क्रू, नट बोल्ट से सफर शुरू करने वाली चंडीगढ़ की यह इंडस्ट्री आज रेलवे, हवाई जहाज, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट, फर्नीचर और खिलौना आदि में लगने वाले स्क्रू चंडीगढ़ से न सिर्फ बल्कि पूरे भारत में बल्कि विश्व में भेजे जाते हैं।
लघु उद्यम की श्रेणी में आने वाले उद्यमों की संख्या लगभग 400 है जिसमें लगभग चार हजार कुशल व अकुशल कर्मचारी रोजगार पाते हैं।