यह मामला वर्ष 1991 का है, उस समय सुमेध सिंह सैनी चंडीगढ़ में एसएसपी के पद पर तैनात थे। उस दौरान सैनी पर एक जानलेवा आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में उनकी सुरक्षा में तैनात चार मुलाजिम मारे गए थे। इस दौरान चंडीगढ़ पुलिस के दो अधिकारियों ने बलवंत सिंह मुल्तानी को 11 दिसंबर, 1991 को मोहाली स्थित उसके घर से उठा लिया था। उन्होंने इसकी जानकारी किसी को नहीं दी थी।
इससे पहले सीबीआई ने 2008 में दर्ज किया था मामला
बलवंत सिंह मुल्तानी के भाई पलविंदर सिंह ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि तत्कालीन एसएसपी चंडीगढ़ सुमेध सिंह के आदेश पर उसके भाई को सेक्टर- 17 चंडीगढ़ में पुलिस थाने ले जाया गया था। सैनी की दहशत और प्रभाव के कारण उसकी रिहाई के लिए किए सभी प्रयासों के बावजूद परिवार उसे वापस लाने में असफल रहा।
इस पर उन्होंने मुल्तानी के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले की काफी लंबी जंग चली। आखिरकार पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के दिशा निर्देशों के अंतर्गत एक प्राथमिक जांच की गई। इसके बाद सीबीआई द्वारा दो जुलाई 2008 को मामला दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट के आदेश को इस आधार पर रद्द कर दिया कि हाईकोर्ट बेंच के पास केस का निपटारा करने के लिए अधिकार क्षेत्र की कमी है। नतीजे के तौर पर सीबीआई की तरफ से इन आदेशों के आधार पर दर्ज एफआईआर को केवल तकनीकी आधार पर रद्द किया गया था। शिकायतकर्ता ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने परिवार को नए सिरे से कार्रवाई की आजादी दी थी। मामले की योग्यता पर कोई टिप्पणी या चर्चा भी नहीं की थी।
चंडीगढ़। अपहरण के इस मामले में 2015 में एक सनसनीखेज खुलासा हुआ था। इस मामले में पुलिस को दी शिकायत में अगवा हुए बलवंत सिंह मुल्तानी के भाई पलविंदर सिंह ने बताया है कि साल 2015 के अंत में पंजाब पुलिस के एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने एक राष्ट्रीय नामी मैगजीन को अपना इंटरव्यू दिया था। वह अधिकारी सैनी के साथ काम कर चुका है। इसमें उस अधिकारी ने खुलासा किया था कि उस समय सुमेध सिंह सैनी और अन्य पुलिस अधिकारियों ने कैसे लोगों को यातनाएं दी थीं। इसमें उनके भाई का जिक्र भी किया गया था। इन यातनाओं से उसके भाई की मौत हो गई थी। इसके बाद विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में इसे प्रकाशित किया गया था। उस समय हमें उम्मीद थी कि अब इस मामले में शायद कुछ होगा। लेकिन सुमेध सैनी के प्रभाव के चलते मामले में कुछ नहीं हुआ था।
सैनी के रिटायर्ड होने पर दोबारा शुरू किया केस दर्ज करवाने का संघर्ष
शिकायत में पलविंदर ने बताया कि सुमेध सैनी के सेवानिवृत्त होने के बाद परिवार ने दोबारा संघर्ष जारी रखने का फैसला किया। फिर हमने उन सभी लोगों से संपर्क साधा जो कि उस समय उसके भाई के साथ रह चुके थे। इस दौरान कई चीजें सामने आई। इसमें कई ऐसे तथ्य थे जो कि हिलाकर रख देने वाले थे। इसके बाद उन्होंने इस दिशा में कार्रवाई की।
ऐसे अगवा किया था बलवंत को
पुलिस को शिकायत में पलविंदर सिंह निवासी जालंधर ने बताया है कि उसके भाई को अगवा करने का मामला 1991 का है। वह सिटको में जेई थे और मोहाली के फेज-7 में रहते थे। उनके पिता दर्शन सिंह मुल्तानी पंजाब के एक सीनियर आईएएस अधिकारी थे। उस दौरान चंडीगढ़ के तत्कालीन एसएसपी सुमेध सिंह सैनी की टीम ने उसके भाई बलवंत को 4 बजे घर से जबरन उठाया था।। इतना ही नहीं मोहाली और पंजाब में उनके कई जानकारों को उठाकर पूछताछ की थी और यातनाएं दी थी। उसे समय भाई की सुरक्षित रिहाई के लिए परिवार ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। मेरे पिता ने सभी कानूनी सहारे लिए थे लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। आखिर में इंसाफ के इंतजार में उनकी मौत हो गई थी। ब्यूरो
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने वीरवार को पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी द्वारा 1991 के एक अपहरण मामले में दर्ज एफआईआर के बाद उन पर लगाए राजनैतिक हितों से प्रेरित होने के आरोपों को सिरे से खारिज किया। सीएम ने कहा कि राजनैतिक दखलअंदाजी का सवाल ही पैदा नहीं होता। उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करेगा और पुलिस निष्पक्ष जांच करेगी।
प्रवक्ता ने बताया कि सुमेध सैनी के खिलाफ बलवंत सिंह मुलतानी की गुमशुदगी का है।
यह मामला पीड़ित के भाई जालंधर निवासी पलविंदर सिंह मुलतानी की तरफ से की नई शिकायत पर आधारित है। पलविंदर मुलतानी की शिकायत पर मोहाली में बुधवार को धारा 364 (कत्ल के इरादे से अगवा करने), 201 (सबूत को गायब करना), 344 (गैर कानूनी हिरासत में रखना) 330 (दबाव बनाकर इकबालिया बयान लेना) और 120 -बी (अपराधिक साजिश रचना) के अंतर्गत दर्ज किया गया है। पुलिस को मंगलवार को नई शिकायत मिली थी। प्रवक्ता ने बताया कि शिकायतकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय के सात दिसंबर, 2011 के आदेशों के पैरा 80 का हवाला दिया। इसके अनुसार यदि कानून में मंजूरी तो ‘जिस आवेदक ने सीआरपीसी की धारा-482 के अंतर्गत याचिका दाखिल की है, वह ताजा कार्रवाई करवा सकता है।
शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में कहा है कि मुलजिम व्यक्तियों की गैर-कानूनी कार्रवाइयां स्पष्ट तौर पर सोच समझ कर अपराध किए जाने का खुलासा करती हैं। जैसे कि सीबीआई ने प्राथमिक जांच में साबित किया है। इसलिए यह पुलिस की गंभीर जिम्मेदारी बनती है कि वह ‘ललिता कुमारी बनाम यूपी स्टेट और अन्य राज्यों के मामले’ में सुप्रीम कोर्ट के विशेष दिशा निर्देशों के अनुसार मुलजिमों के विरुद्ध इन घिनौनी कार्रवाइयों के लिए केस दर्ज करे।
पलविंदर मुलतानी ने शिकायत में कहा कि बलवंत मुलतानी को 11 दिसंबर, 1991 को मोहाली में उस समय उसके आवास से उठा लिया गया था। उस समय एसएसपी चंडीगढ़ सुमेध सिंह सैनी पुत्र रोमेश चंद्र सैनी के आदेशों पर सेक्टर 17 चंडीगढ़ में पुलिस थाने ले जाया गया था। शिकायतकर्ता ने कहा, ‘सुमेध सिंह सैनी की दहशत और प्रभाव के कारण उसकी रिहाई के लिए किए सभी प्रयासों के बावजूद परिवार उसे वापस लाने में असफल रहा।’
शिकायतकर्ता ने कहा कि सैनी की सेवा मुक्ति के बाद उन्होंने न्याय की लड़ाई के लिए अपने प्रयास फिर शुरू करने की हिम्मत जुटाई। उनके निरंतर यत्नों के परिणामस्वरूप आखिरकार पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के दिशा निर्देशों के अंतर्गत एक प्राथमिक जांच की गई। इसके बाद सीबीआई.चंडीगढ़ द्वारा दो जुलाई 2008 को मामला दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट के आदेशों को इस आधार पर रद्द कर दिया कि हाईकोर्ट के बैंच के पास केस का निपटारा करने के लिए अधिकार क्षेत्र की कमी है। नतीजे के तौर पर सीबीआई की तरफ से इन आदेशों के आधार पर दर्ज एफआईआर को केवल तकनीकी आधार पर रद्द किया गया था। शिकायतकर्ता ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने परिवार को नए सिरे से कार्रवाई की आजादी दी थी। मामले की योग्यता पर कोई टिप्पणी या चर्चा भी नहीं की थी।