एक महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गर्भपात की इजाजत मांगी है। महिला ने हाईकोर्ट को बताया है कि पीजीआई में उसके गर्भ की जांच हुई थी। इसमें यह सामने आया है कि उसका बच्चा एक बेहद ही घातक रोग से ग्रसित है। अगर वह पैदा हुआ तो उसमें कई मानसिक और शारीरिक अक्षमताएं होंगी।
जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये याचिका पर सुनवाई करते हुए पीजीआई से जवाब मांगा। पीजीआई ने बताया कि महिला के गर्भ की जांच के बाद सामने आया था कि उसके गर्भ में पल रहा शिशु डाउन सिंड्रोम बीमारी से ग्रसित है। अगर उसका यह बच्चा पैदा हुआ तो तो वह शारीरिक और मासिक तौर पर अक्षम रह जाएगा।
ऐसे में महिला को गर्भपात करवाए जाने का सुझाव दिया गया था, लेकिन मेडिकल टर्मिनेशन एंड प्रेगनेंसी एक्ट के तहत अगर गर्भ 20 सप्ताह से ज्यादा का हो गया हो तो मेडिकल बोर्ड गठित किया जाना जरूरी है। गर्भपात के लिए भी हाईकोर्ट की इजाजत अनिवार्य है। इस मामले में पीजीआई मेडिकल बोर्ड गठित कर चुका है और वीरवार को बोर्ड महिला की जांच करेगा।
जस्टिस सेठी ने इस जानकारी के बाद महिला को वीरवार सुबह 11 बजे मेडिकल बोर्ड के समक्ष पेश होकर जांच करवाए जाने के आदेश दे दिए हैं। बोर्ड को भी आदेश दिए हैं कि वह महिला के गर्भ की जांच कर उसकी सीलबंद रिपोर्ट शुक्रवार को हाईकोर्ट के समक्ष पेश करे, जिसके आधार पर हाईकोर्ट आगे निर्देश जारी कर सकता है।