कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन और कर्फ्यू का शहर के जनजीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। वहीं, शहर के लाखों वाहनों की चाल पर ब्रेक लगने से आबोहवा पहले से कहीं बेहतर हुई है। वाहनों के नहीं चलने से एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) में 70 प्रतिशत से भी ज्यादा सुधार हुआ है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि शहर की हवा को दूषित करने में 50 प्रतिशत से ज्यादा योगदान वाहनों का ही है।
चंडीगढ़ को वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण देश के सबसे अधिक दूषित 102 शहरों की सूची में शामिल कर लिया गया है। एनजीटी के सर्वे में चंडीगढ़ के पीएम-2.5 और पीएम-10 का स्तर बढ़ा हुआ मिला था, जिसके बाद एनजीटी से अगले दो साल में शहर के प्रदूषण के स्तर में सुधार के लिए यूटी प्रशासन को निर्देश मिले थे। यूटी और चंडीगढ़ पर्यावरण नियंत्रण कमेटी की ओर से शहर की आबोहवा को 20 प्रतिशत तक शुद्ध करने की कवायद चल रही है।
इसी बीच कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए शहर में कर्फ्यू लगा हुआ है। इस कारण लाखों वाहनों के पहिये पर ब्रेक लगी है। वाहनों के नहीं चलने से शहर के वायु प्रदूषण में 70 प्रतिशत से ज्यादा सुधार हुआ है। 10 दिनों में शहर का एक्यूआई 90 से गिरकर 26 तक पहुंच गया है। रात में हालात और भी सुधर जाते हैं। एक्यूआई का स्तर 23 तक पहुंच जाता है।
सबसे अधिक कारों के घनत्व वाला है चंडीगढ़
देश में चंडीगढ़ शहर सबसे अधिक कारों के घनत्व वाला शहर माना जाता है। यहां पर कारों की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है। हर दो महीने में शहर के लोग 10 हजार नए वाहन पंजीकृत कराते हैं। अब तक शहर में सिर्फ कारों की संख्या 12 लाख से अधिक पहुंच चुकी है। शहर में पीक ऑवर्स में 15 मिनट के सफर के लिए 40 मिनट तक लग जाते हैं।
एनजीटी दे चुका है 10 करोड़
चंडीगढ़ की हवा को शुद्ध करने के लिए एनजीटी की ओर से 10 करोड़ दिए जा चुके हैं। सीपीसीसी के जरिए यह राशि नगर निगम और अन्य विभागों को दी गई है। इस राशि से शहर की आबोहवा को शुद्ध करने के लिए कार्य किए जा रहे हैं। हालांकि, मार्च तक एनजीटी को यूटी प्रशासन की ओर से इस मामले में जवाब दाखिल करना था, लेकिन कोरोना वायरस के बीच कर्फ्यू के कारण जवाब दाखिल करने की तिथि आगे टाल दी गई है।
फैक्टरियां भी हैं बंद
शुद्ध हवा का एक कारण यह भी है कि कर्फ्यू के कारण शहर की 2000 औद्योगिक इकाइयां बंद पड़ी हैं। इसके साथ ही कई ऐसे रेस्टोरेंट और होटल भी बंद पड़े हैं, जहां तंदूर आदि का प्रयोग होता है, जो कोरोना संक्रमण के दौरान लगाए गए कर्फ्यू में बंद पड़े हैं। इससे निकलने वाला धुआं इन दिनों बंद है, जो वातावरण को प्रदूषित नहीं कर पा रहा है।
चंडीगढ़ के प्रदूषक (पॉल्युटेंट) पर एक नजर
पॉल्यूटेंट मिनिमम एवरेज मैक्सिमम
पीएम 2.5 14 22 30
पीएम 10 35 42 52
एनओ 2 9 12 17
एनएच 3 11 14 16
एसओ 2 7 14 28
सीओ 12 18 29
ओजोन 7 22 40