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कोरोना कमांडोः महामारी क्या मौत भी सामने होगी तो ड्यूटी से पीछे नहीं हटेंगे, ईश्वर है साथ तो क्या डर

Wed, 08 Apr 2020 01:59 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
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कोरोना कमांडो नर्स - फोटो : अमर उजाला
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परिवार का प्यार और मन में अपने फर्ज के प्रति ईमानदारी हो तो किसी भी संकट से आसानी से पार पाया जा सकता है। यही मंत्र है सेक्टर-32 स्थित जीएमसीएच की नर्सों का। कोरोना जैसी महामारी के दौर में जीएमसीएच की नर्सें डर को दरकिनार कर कोरोना के मरीजों के बीच रहकर पूरी जिम्मेदारी से अपनी ड्यूटी कर रही हैं। इन्हीं नर्सों में शामिल हैं रेखा रानी और करमजीत कौर।
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इन दोनों नर्सों ने अपने परिवार को समझाते हुए अपने फर्ज को पूरा करने के लिए खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार कर लिया है। मौजूदा समय में दोनों बिना डर के दिनरात मरीजों की देखभाल में जुटी हैं। जीएमसीएच में स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत रेखा रानी पंजाब की रहने वाली हैं। नौकरी के लिए उन्हें परिवार को छोड़कर चंडीगढ़ आना पड़ा।

रेखा ने बताया कि जीएमसीएच में सालों से ड्यूटी कर रही हैं लेकिन ऐसी स्थिति कभी नहीं आई। कोरोना के बारे में सुनकर शुरू में तो थोड़ा डर लगा था लेकिन फिर डॉक्टरों और बाकी लोगों के जज्बे को देखकर सारा डर दूर हो गया। आइसोलेशन वार्ड में कोरोना पॉजिटिव मरीजों के बीच लगातार कई घंटे ड्यूटी करने के बाद भी अब तक एक बार भी मन में कोई नकारात्मक विचार नहीं आया।
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रेखा ने बताता की ड्यूटी के दौरान खुद की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रखती हैं। उन्होंने बताया कि प्रोटेक्शन किट पहनने के बाद पानी भी नहीं पीते। ड्यूटी के दौरान पूरी रात जागकर एक-एक मरीज पर नजर रखते हैं।
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जब साथ में ईश्वर है तो कोरोना से क्या डर

कोरोना से डरने की सोचूं भी क्यों, जब मेरे सिर पर ईश्वर का आशीष है। अगर अपना फर्ज पूरा करते हुए मुझे कुछ हो भी जाता है तो लोग हमेशा मुझे याद रखेंगे। यह कहना है जीएमसीएच की ही स्टाफ नर्स करमजीत कौर का, जो लगातार कोरोना वार्ड में ड्यूटी कर रही हैं। अपने माता-पिता और भाई-बहनों की सबसे चहेती करमजीत के लिए अपनी ड्यूटी से बढ़कर कुछ नहीं।

करमजीत का कहना है कि नर्सिंग की पढ़ाई के बाद दिलाए जाने वाले शपथ में हमें हर हाल में मानवता की सेवा का संदेश दिया जाता है और मैं अपना फर्ज निभा रही हूं। उन्होंने बताया कि जब मेरे परिवार को पता चला कि मेरी कोरोना वार्ड में ड्यूटी लगी है तो सबने एक साथ कहा कि अब हॉस्पिटल नहीं जाना लेकिन मैंने सबको समझाया और अपनी ड्यूटी के लिए राजी किया।

अपनों के प्यार और ईश्वर पर विश्वास ने मुझे हर पल ताकत दी है, जिसके बल पर मैं इस संकट की घड़ी में अस्पताल में अपने मोर्चे पर तैनात हूं।
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