सेक्टर-25 के श्मशान घाट में गुरुवार दोपहर अंतिम संस्कार के दौरान बच्ची को एक बंद पैकेट में लाया गया। मौके पर मौजूद बच्ची की मां का रो-रोकर बुरा हाल था। बच्ची की मां अपने कलेजे के टुकड़े को आखिरी बार छाती से लगाकर जीभर रोना चाहती थी लेकिन वह आखिरी बार उसे देख भी न सकी। वहीं, जिस पिता ने अपनी गोद में बच्ची को खिलाया वह अपनी बेटी को छू तक न सका। इस गम की घड़ी में नाना-नानी भी अपनी नातिन को न देख सके। सभी का रो-रो कर बुरा हाल था।
बड़ा सवाल: बच्ची पीजीआई आने से पहले संक्रमित हुई या पीजीआई में
इस समय यह बड़ा सवाल है कि बच्ची पीजीआई आने से पहले कि संक्रमित थी या पीजीआई में कोरोना की चपेट में आई। चौंकाने वाली बात यह है कि कोरोना को लेकर पीजीआई में एक के बाद एक पॉजिटिव केस सामने आने के बावजूद पीजीआई प्रशासन इसकी प्रारंभिक स्क्रीनिंग की व्यवस्था नहीं कर रहा है।
इस चूक के कारण ही छह माह की बच्ची के साथ पीजीआई के 54 लोगों पर कोरोना का खतरा मंडराने लगा था। अब भी पीजीआई के जिन डिपार्टमेंट में ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं चल रही हैं, वहां आने वाले मरीजों की कोई जांच नहीं हो रही है। इसके कारण यह मरीज सीधे पीजीआई के डॉक्टरों और अन्य स्टाफ के संपर्क में आ रहे हैं। ऐसे में पीजीआई प्रशासन अगर जल्द सतर्क नहीं हुआ तो मामला गंभीर हो सकता है।
जालंधर से रेफर होकर पीजीआई आई थी बच्ची
फगवाड़ा (पंजाब) निवासी बच्ची के दिल में छेद था। परिजन उसे बीते 9 अप्रैल को पीजीआई लेकर पहुंचे, जिसके बाद बच्ची की ओपन हार्ट सर्जरी हुई। हालांकि इससे पहले उसे जालंधर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बच्ची को वहीं से पीजीआई रेफर किया गया था। जांच के बाद बच्ची को 9 अप्रैल को पीजीआई के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर में भर्ती किया गया था।
सर्जरी के बाद बच्ची बिल्कुल स्वस्थ थी लेकिन अचानक बच्ची को इंफेक्शन होने लगा। शक होने पर डॉक्टरों ने बीते मंगलवार दोपहर बच्ची का कोरोना टेस्ट कराया। जांच रिपोर्ट में वह पॉजिटिव पाई गई। बुधवार सुबह रिपोर्ट आने के बाद पीजीआई में हड़कंप मच गया।
बच्ची को तत्काल एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर पीजीआई के कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल की आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। आनन-फानन में बच्ची के संपर्क में आने वाले 18 डॉक्टरों समेत पीजीआई के 54 स्टाफ को होम क्वारंटीन कर दिया गया। इसके बाद सभी नमूने लिए गए। वहीं पीडियाट्रिक सेंटर के वार्ड नंबर 4 सी में भी दहशत फैल गई।
बच्ची को डॉ. अरुण कुमार भारनवाल ने देखा था इसलिए उनकी पूरी टीम, उस वार्ड में काम करने वाले स्वीपर, वार्ड ब्वॉय और अन्य कर्मचारियों को भी होम क्वारंटीन कर सभी के नमूने लिए गए। साथ ही परिवार के सदस्यों के भी नमूने लिए गए। गुरुवार सुबह ही सभी लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आने से पीजीआई प्रबंधन ने राहत की सांस ली, लेकिन दोपहर होते-होते बच्ची की मौत हो गई।