कोरोना संक्रमण से बचाव का सबसे आसान और बेहतर तरीका है घर में रहकर सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का पालन किया जाए। आप की सुरक्षा के लिए हम अपने घर से दूर अस्पताल में पॉजिटिव मरीजों के बीच ड्यूटी कर रहे हैं। आप से अपील है कि अपनी और अपने घरवालों की सुरक्षा के लिए एक बात मानें और देश को कोरोना मुक्त बनाने में अपना योगदान दें। यह कहना है जीएमएसएच-16 की स्टाफ नर्स दलजीत और उनकी बहन बलजीत कौर का।
दोनों बहनें दो महीने से अस्पताल के कोविड आइसोलेशन वार्ड में लगातार ड्यूटी कर रही हैं। इनके लिए परिवार और फर्ज दोनों ही महत्वपूर्ण हैं, इसलिए ड्यूटी और परिवार के बीच तय मानकों का शत-प्रतिशत पालन करती हैं। इसका ही नतीजा है कि दो महीने से लगातार ड्यूटी करने के बावजूद उन्हें या उनके परिवार के किसी भी सदस्य में किसी प्रकार का कोई संक्रमण नहीं हुआ।
अस्पताल में सीनियर और घर में पूरा परिवार कर रहा सहयोग
दलजीत और बलजीत कौर ने बताया कि अस्पताल में ड्यूटी के दौरान कभी भी किसी तरह की कोई समस्या सामने नहीं आती। खासतौर पर हमारी सिस्टर इंचार्ज परमिंदरजीत थिंद हमारी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कहने से पहले ही उसे पूरा कर देती हैं। उनके सहयोग से ही आज दर्जनों स्टाफ नर्स निडर होकर कोरोना के पॉजिटिव मरीजों के बीच ड्यूटी कर रही हैं।
उनके सहयोग और प्यार का ही नतीजा है कि एक भी स्टाफ ने अपनी ड्यूटी लिस्ट से नाम कटवाने की कोशिश नहीं की। हमारा मनोबल बढ़ाने के लिए वह लगातार हमारे साथ पॉजिटिव मरीजों के बीच ड्यूटी कर रही हैं। दलजीत ने बताया कि घर पर माता-पिता, भाई-भाभी और उनके दोनों बच्चों का भी भरपूर प्यार मिलता है। वे अस्पताल में ड्यूटी के दौरान मेरा हालचाल लेते रहते हैं।
वहीं, बलजीत कौर के पति और सास ससुर का सहयोग उनकी मुश्किल आसान कर रहा है। दोनों बहनों का कहना है कि घर से निकलते वक्त घर के बड़े सिर पर हाथ फेरकर हमारी सलामती की दुआ करते हैं। उनके प्यार और आशीर्वाद का ही नतीजा है, जो हम दोनों बहन कोरोना जैसे गंभीर बीमारी वाले मरीजों के बीच ड्यूटी करते हुए एक मिनट के लिए भी कभी नहीं डरे।
तीनों बेटियां मरीजों की करती हैं सेवा
दलजीत की मां गुरमीत कौर ने बताया कि दलजीत और बलजीत कौर के साथ ही उनकी तीसरी बेटी जसवीर कौर जीएमएसएच-16 में नौकरी करती है। वह लैब टेक्नीशियन है। इस समय प्रेग्नेंट होने के कारण वह छुट्टी पर है। कोरोना महामारी के समय अस्पताल में सबकी ड्यूटी लगने की सूचना मिलने पर उसने भी ड्यूटी ज्वाइन करने की इच्छा जताई, लेकिन सुरक्षा कारणों से उसे अस्पताल जाने से रोक दिया।
वह ड्यूटी पर न रहते हुए भी प्रतिदिन सारी जानकारी अपनी बहनों से लेती है और उनकी हिम्मत बढ़ाती है। गुरमीत कौर का कहना है कि आज मुझे इस बात का फख्र होता है कि मैं 3 बहादुर बेटियों की मां हूं। इनमें से दो इस समय कोरोना से जंग में सीधे तौर पर मोर्चा ले रही हैं।