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एडिशनल एसएचओ बनीं 'देवदूत', गर्भवती की बचाई जान, दुनिया में आई नन्हीं जान...पढ़ें मामला

Thu, 28 May 2020 11:20 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर जौनपुर जाने को पहुंची थी गर्भवती
  • अचानक प्रसव पीड़ा के कारण प्लेटफार्म पर लेट गई गर्भवती
  • महिला ने एंबुलेंस में बेटे को दिया जन्म
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गर्भवती महिला को अस्पताल ले जातीं एसएचओ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एडिशनल एसएचओ देवदूत बनकर आईं और उन्होंने गर्भवती महिला की जान बचा ली। उनके सहयोग से एक नन्ही जान भी दुनिया में सही सलामत आ गई। मामला चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर देखने को मिला। सिटी ब्यूटीफुल के रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म नंबर-1... बुधवार सुबह के साढ़े 11 बजे थे कि अचानक एक महिला रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर लेट कर तड़पने लगी। आसपास के लोग खड़े उसे देखने लगे। लोग पहले तो समझ नहीं पा रहे थे कि महिला अचानक इतनी जोर से क्यों चिल्ला रही है।
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जैसे ही इसकी जानकारी रेलवे स्टेशन पर तैनात जीआरपी थाना की एडिशनल एसएचओ उर्मिला को लगी तो वह दौड़कर मौके पर पहुंचीं। देखते ही वह समझ गईं कि महिला गर्भवती है और प्रसव पीड़ा से तड़प रही है। क्योंकि एक महिला की पीड़ा को दूसरी महिला ही समझ सकती है, इसलिए बिना देरी किए महिला एडिशनल एसएचओ ने तुरंत एंबुलेंस को फोन किया और फिर रेलवे की मेडिकल टीम को मामले की जानकारी देकर तुरंत बुलाया। रेलवे की मेडिकल टीम भी बिना देरी किए मौके पर पहुंच गई।

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जब तक एंबुलेंस आती, रेलवे के डॉक्टरों ने महिला की प्राथमिक जांच स्टेशन पर ही पर्दा लगाकर शुरू कर दी। डॉक्टरों को जांच में पता चला कि महिला को तत्काल अस्पताल नहीं पहुंचाया गया तो उसकी डिलीवरी यहीं पर हो जाएगी, जिससे उसकी जान को खतरा हो सकता है। इसके बाद उर्मिला ने बिना देरी किए खुद अपने स्टाफ के साथ स्ट्रेचर उठाया और रेलवे स्टेशन के वीआईपी मार्ग से अस्पताल ले जाने के लिए स्टेशन परिसर से बाहर महिला को लाईं।

अभी वह अस्पताल ले जाने के लिए गाड़ी का बंदोबस्त कर ही रही थीं कि मौके पर एंबुलेंस भी पहुंच गई और महिला को स्ट्रेचर पर एंबुलेंस में लिटाया गया। फिर मनीमाजरा के सिविल अस्पताल के लिए एडिशनल एसएचओ उर्मिला निकल पड़ीं। अभी वह रास्ते में ही थीं कि महिल ने बेटे को जन्म दे दिया। इसके बाद महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
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आखिर एक मां ने क्यों डाली अपनी और अपने बच्चे की जान जोखिम में...

कोरोना महामारी के चलते लगे लॉकडाउन ने प्रवासी मजदूरों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। इसलिए वे अपने प्रदेश लौटना चाहते हैं। इसी तरह सुल्तानपुर निवासी पवन भी अपनी पत्नी को लेकर चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पहुंचा था। उसे जौनपुर जा रही श्रमिक स्पेशल ट्रेन में बैठना था।

अभी वह रेलवे स्टेशन पर पहुंचा ही था कि अचानक उसकी पत्नी को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। पवन ने बताया कि ढाई माह से वह घर पर बैठा है और पत्नी की देखरेख के लिए भी यहां कोई नहीं था। लॉकडाउन में घर से किसी को बुला नहीं सकता था। इसलिए अपनी पत्नी की देखरेख के लिए वह उसे अपने गांव ले जा रहा था।
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