कमेटी ने अपनी सिफारिशों में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और नीति आयोग की कोविड-19 के भयंकर फैलाव के अनुमानों को ध्यान में रखते हुए सूबे में मेडिकल तैयारियों को कमजोर माना है। कमेटी ने कोविड-19 संक्रमण से मुकाबले के लिए आईसीयू और नॉन-आईसीयू बेडों की संख्या बढ़ाने की सिफारिश की है। विभाग के पास आइसोलेशन सेंटरों में अभी 2900 बेड हैं, जिन्हें 17000 करने के लिए सेंटरों की पहचान की जा रही है। इस उपलब्धता में 50 फीसदी इजाफे की जरूरत है।
राज्य में कोरोना के प्रतिदिन 1200 टेस्ट करने की क्षमता
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राज्य में कोविड-19 के लिए टेस्टिंग क्षमता फिलहाल काफी कम है। यहां तक कि राज्य के बड़े जिलों में भी टेस्टिंग की क्षमता समुचित मात्रा में उपलब्ध नहीं है। राज्य में अब तक कोविड-19 के मद्देनजर केवल 9000 टेस्ट किए गए हैं। सूबे में इस समय 25000 आरटी पीसीआर टेस्ट किटें ही उपलब्ध हैं। इनके चलते टेस्टिंग की रोजाना क्षमता केवल 1200 टेस्ट की है, जिसे बढ़ाने की सख्त जरूरत है।
कोविड-19 संकट से निपटने के लिए गठित की गई कमेटी ने सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को रिपोर्ट सौंपते हुए यह सिफारिश की है। कमेटी ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर रिपोर्ट में की सिफारिशों में स्पष्ट किया है कि नया सत्र आरंभ होने में हो रही देरी को देखते हुए सभी स्कूलों को प्री बोर्ड परीक्षाओं में विद्यार्थियों के प्रदर्शन के आधार पर ही इस बार दसवीं की परीक्षा के परिणाम घोषित कर दिए जाएं।
इसके साथ ही कमेटी ने 12वीं कक्षा के वार्षिक परीक्षा परिणाम को लेकर यह सिफारिश की है कि चूंकि 12वीं कक्षा के 70 फीसदी पेपर हो चुके हैं, इसलिए सोशल डिस्टेंस जैसे नियमों का पालन करते हुए राज्य में अतिरिक्त परीक्षा केंद्रों की स्थापना कर 12वीं के बाकी बचे पेपर भी करा लिए जाएं। दसवीं के परीक्षा परिणामों के लेकर कमेटी का कहना है कि यह माना जाता है कि प्री बोर्ड परीक्षाओं में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच काफी गहनता से होती है इसलिए परीक्षा परिणाम में विद्यार्थियों को कुछ विशेष राहत दी जा सकती है।
कमेटी ने कहा है कि रिजल्ट घोषित किए जाने के साथ ही विद्यार्थी अगली कक्षा के लिए तैयारी शुरू कर सकते हैं और स्कूल भी विद्यार्थियों की 11वीं कक्षा में एडमिशन का काम शुरू कर सकते हैं। पांचवीं और आठवीं कक्षा के वार्षिक परीक्षा परिणाम को लेकर कमेटी ने सिफारिश की है कि इन कक्षाओं के अब तक जितने पेपर हो चुके हैं, उन्हीं के आधार पर ही परीक्षा परिणाम घोषित करते हुए विद्यार्थियों को अगली क्लास में प्रवेश दे दिया जाए।
पाठ्य पुस्तकें छापने के लिए खोली जाएं प्रिंटिंग प्रेस
कमेटी ने कहा है कि कर्फ्यू-लॉकडाउन के कारण प्रिंटिंग प्रेसों में काम बंद है। कमेटी ने प्रिंटिंग प्रेसों को खोलने की सिफारिश करते हुए कहा है कि पाठ्य पुस्तकों की छपाई जल्द शुरू की जाए और संबंधित जिलों के डीसी पूरे एहतियात बरतते हुए पुस्तकों को विद्यार्थियों तक पहुंचाएं।