जालंधर में आजमगढ़ जाने से पहले एकत्रित हुए प्रवासी लोग।
- फोटो : अमर उजाला
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के गृह जनपद पटियाला में फंसे लोगों को उत्तर प्रदेश और बिहार में उनके घरों तक भेजने के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। अब तक करीब 34 हजार लोग प्रशासन के पास रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। यह लोग यूपी के जौनपुर, अंबेडकर नगर और सुल्तानपुर जिले के हैं। बड़ी संख्या में इनमें मजदूर, छात्र और आम लोग हैं।
इन आम लोगों में कोई यहां ऑपरेशन कराने आया था तो कोई अपने रिश्तेदार से मिलने। इसी बीच कर्फ्यू लग गया और वे पटियाला में ही फंस गए। बुधवार को पटियाला से 1200 लोग आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) को रवाना हुए थे। अब आने वाले दिनों में बाकी 32 हजार 800 लोगों को भेजने के लिए 16 से ज्यादा विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। बता दें कि पटियाला से विशेष बसों के जरिये जम्मू-कश्मीर 500 लोग और राजस्थान 145 लौट चुके हैं।
जालंधर से तीन ट्रेन में आजमगढ़-बिहार के लिए निकले प्रवासी
लॉकडाउन में फंसे अन्य राज्यों के यात्रियों को सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए गुरुवार को भी तीन ट्रेनें चली। पहली ट्रेन यूपी के आजमगढ़ के लिए 11:58 बजे रवाना हुई। दूसरी दरभंगा के लिए शाम 5:00 बजे और तीसरी बहराइच (उत्तर प्रदेश) के लिए चली। यात्रियों को मेडिकल चेकअप और टिकट देने के बाद बसों से सिटी रेलवे स्टेशन पहुंचाया गया। डीसी ने कहा कि श्रमिकों को उनके गांव में सुरक्षित भेजने के लिए ट्रेनें चलाने का क्रम जारी रखा जाएगा। यात्रा पूरी तरह से निशुल्क है और राज्य सरकार की तरफ से ही सारा खर्च किया जा रहा है।
चेहरों पर उदासी और घर तक सकुशल पहुंचने की चिंता के बीच 900 प्रवासी मजदूर अमृतसर से रवाना हो गए। जिला प्रशासन ने मजदूरों को विशेष ट्रेन से गोंडा रवाना करने से पहले स्टेशन को पूरी तरह सील किया। रेलवे पुलिस फोर्स, जीआरपी व पंजाब पुलिस के जवानों ने रेलवे स्टेशन के तीन एंट्री प्वाइंट पर नाकेबंदी की।
प्लेटफार्म पर पुलिस तैनात रही। रेलवे स्टेशन के एंट्री प्वांइट पर केवल रजिस्ट्रेशन करवाने वाले मजदूरों को जाने की अनुमति थी। इन मजदूरों के पास कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट भी थी। ट्रेन में बैठने से पहले मजदूरों को सैनिटाइजर और मास्क उपलब्ध करवाया गया।
डीसीपी मनविंदर सिंह ने बताया कि बोगी में चढ़ने से पहले मजदूरों के बारे में पूरी जानकारी एक रजिस्टर में दर्ज की गई। बोगी में सामाजिक दूरी का पालन करने के निर्देश भी दिए गए। मजदूरों को खाने के पैकेट व पानी की बोतल दी गई। घर लौट रहे मजदूरों ने सरकार का इन सुविधाओं के लिए शुक्रिया अदा किया।
मजदूरों के घर लौटने से घबराए उद्योगपतियों ने विधायक सुनील दत्ती के साथ बैठक की। इस बैठक में मजदूरों के घर जाने से उद्योग पर पड़ने वाले प्रभाव व कौन-कौन से उद्योग चलाए जा सकते हैं, इस पर चर्चा की गई।
बैठक के बाद सुनील दत्ती ने दावा किया कि नौ मई से उद्योग शुरू होने की खबर के बाद आज जाने वाले मजदूरों की संख्या में 30 फीसदी की कमी आई है। जिन्होंने जाने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया था, उनमें से एक तिहाई मजदूर अमृतसर में ही रुक गए हैं।
उद्योगपति कृष्ण कुमार कुकू ने कहा कि एक उद्योग को चलाने के लिए कम से कम दस लाख की राशि की जरूरत है। जब मजदूरों के जाने की बात सुनी तो उद्योगपतियों में निराशा फैल गई है। इनको काम देकर रोका जा सकता है। अब उद्योग को बंद नहीं होने दिया जाएगा। मजदूर घर लौट गए तो वह वापस नहीं आएंगे।