रानी नागर ने अपने फेसबुक पर गुरुवार नया पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा है कि सभी से हाथ जोड़कर सादर विनती है मेरा इस्तीफा स्वीकार न किए जाने को लेकर आग्रह व आंदोलन न करें। मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। अपने केस में न्यायपालिका में जाती रहूंगी। मेरे पास अभी रोटी खाने के लिए भी बहुत सीमित साधन हैं।
सभी से विनती है कि जितनी जल्दी मेरा इस्तीफा स्वीकार होगा, उतनी ही जल्दी तनख्वाह में से कटा हुआ एनपीएस फंड प्राप्त होगा, जिससे अपना रोटी का खर्चा चला पाऊंगी। इस्तीफा स्वीकार न होने से मेरा और अधिक शोषण होगा। आगे सरकारी नौकरी कर पाना मेरे लिए संभव नहीं है। यदि मेरा इस्तीफा रोकने बारे आग्रह व आंदोलन न करें तो सभी की हम पर बड़ी दया होगी।
ट्विटर पर डाली खाने में परोसी पिन की फोटो
रानी ने गुरुवार को ही ट्विटर पर यूटी गेस्ट हाउस में 13 दिसंबर 2019 को लंच में परोसी गई लोहे की पिन व शिकायत की फोटो भी डाली है। रानी ने लिखा है कि यूटी गेस्ट हाउस के कमरे में स्वयं खाना बनाने के लिए गैस व चूल्हा लगाना मना था। रुपये देकर यूटी गेस्ट हाउस से जो खाना खरीदती थी, उसे लोहे के पिन डालकर दिया जाता था।
लॉकडाउन व कर्फ्यू में यूटी गेस्ट हाउस को जनता के लिए बंद कर दिया गया लेकिन उन्हें और बहन रीमा नागर को वहीं रखा। कर्फ्यू में हमें खाना भी नहीं मिला। दोनों ने बड़ी मुश्किल से तरल पदार्थ आदि से अपना गुजारा चलाया।