जेल मंत्री रणजीत सिंह ने बताया कि ऐसे कैदी जिनकी सजा सात वर्ष से अधिक नहीं है, कोई भी अन्य केस माननीय न्यायालय में लंबित नहीं है या फिर कोई जुर्माना भी बकाया नहीं है, जेल में अच्छा आचरण होने पर छह से आठ सप्ताह तक की विशेष पैरोल का प्रावधान उनके लिए किया गया है। पैरोल के इस प्रावधान में उन कैदियों को भी शामिल किया गया है जिनकी अधिकतम सजा सात वर्ष तक की है तथा उन पर कोई केस लंबित नहीं है और वह जमानत पर हैं।
इसमें एक शर्त रखी गई है कि कैदी ने इससे पहले ली हुई पैरोल शांतिपूर्ण व्यतीत की हो तथा अधिक मात्रा में मादक पदार्थ, धारा 379 बी, पॉक्सो एक्ट, बलात्कार और एसिड अटैक जैसे मामलों में सजायाफ्ता न हो। रणजीत सिंह ने कहा कि जिन कैदियों के पैरोल या फरलो के मामले पहले से ही जिलाधीश या मंडलाधीश के पास लंबित हैं, उनके केसों को भी सहानुभूति पूर्ण जल्दी निपटाया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित करेंगे कि ऐसे लंबित केसों में तीन से छह दिन में निर्णय आवश्यक रूप से लिया जाए।
कैदियों के साथ हवालाती बंदियों के लिए भी जमानत पर रिहा करने का प्रावधान रखा गया है। हवालाती जो अधिकतम सात वर्ष तक की सजा के अपराध में जेल में बंद हैं तथा उन पर कोई अन्य केस न्यायालय में लंबित नहीं है, जेल में अच्छे आचरण के आधार पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश व मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी उन्हें जमानत पर रिहा करेंगे या फिर 45 से 60 दिन तक की अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाएगा।
कोरोना संक्रमण रोकने को लेकर जेल प्रशासन सतर्क
रणजीत सिंह ने कहा कि कोरोना को देखते हुए जेलों में हर आवश्यक कदमों को उठाया जा रहा है। यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि जेल में बंद कैदियों के स्वास्थ्य का पूरा ख्याल रखा जाए। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए कैदियों और बंदियों के लिए मानवीय आधार पर बड़े फैसले लिए गए हैं ताकि जेलों में कैदियों के दबाव को कम किया जा सके। एहतियातन किसी भी स्थिति में लॉ एंड ऑर्डर का पालन करते हुए अगर पुलिस गिरफ्तारियां करती है तो उन लोगों के लिए जेलों में जगह की सुनिश्चित की जाएगी