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कोरोना: 10000 से कम केस वाले प्रदेशों में सबसे ज्यादा मौत चंडीगढ़ में, बिगड़ी सकती है स्थिति

Wed, 02 Sep 2020 11:23 AM IST
खुशबू गोयल आशीष वर्मा, चंडीगढ़

सार

  • चंडीगढ़ में अब तक 57 संक्रमितों की हो चुकी है मौत
  • विशेषज्ञ बोले- नहीं चेते तो स्थिति हो सकती है भयावह
  • कम टेस्टिंग हो सकती है ज्यादा मौतों की वजह
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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चंडीगढ़ में अब कोरोना की स्थिति बेकाबू हो गई है। पिछले एक हफ्ते से रोजाना 200 के आसपास मरीज मिल रहे हैं, जबकि मंगलवार तक मौतों का आंकड़ा 57 तक पहुंच गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, जिन प्रदेश/यूटी में कोरोना के दस हजार से कम केस हैं, उनमें सबसे ज्यादा मौतें चंडीगढ़ में दर्ज की गई हैं। यूटी प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, 57 में से 75 फीसदी तक मौतें सिर्फ अगस्त में हुई हैं। चंडीगढ़ के बिगड़ते हालात पर विशेषज्ञों ने भी चिंता जाहिर की है।
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उनका कहना है कि कोरोना को रोकने के लिए अब प्रशासन को युद्ध स्तर पर कदम उठाने होंगे। यदि नहीं चेते तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयानक हो सकती हैं। रोजाना आ रहे पुष्ट केसों की स्थिति में चंडीगढ़ पूरे देश में टॉप पर बना हुआ है और दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों को पीछे छोड़ दिया है। चंडीगढ़ का डेली ग्रोथ रेट 5.1 फीसदी है, जबकि बाकी प्रदेशों की स्थिति इससे नीचे बनी हुई है। दूसरे नंबर पर छत्तीसगढ़ का डेली ग्रोथ रेट 4.9 फीसदी और तीसरे स्थान पर झारखंड है, जिसका ग्रोथ रेट 4.7 फीसदी रिकार्ड किया गया है।

पीजीआई के स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार ने बताया कि ज्यादा मौत आने के पीछे एक कारण टेस्टिंग का कम होना हो सकता है। चंडीगढ़ में प्रति मिलियन 600 से 700 टेस्ट हो रहे हैं। चंडीगढ़ में अभी दूसरे शहरों के मुकाबले टेस्टिंग कम हो रही है। चंडीगढ़ का पॉजिटिविटी रेट भी ज्यादा दर्ज किया जा रहा है। ज्यादा टेस्ट और जल्दी कांटेक्ट ट्रेसिंग से मरीजों का पता जल्दी चलेगा। इससे उन्हें जल्दी आइसोलेट किया जा सकेगा और संक्रमण को रोका जा सकता है।
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दूसरा कारण यह भी हो सकता है कि गंभीर मरीज अस्पताल में देरी से दाखिल हो रहे हैं। एक कारण यह भी हो सकता है कि शहर के अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ गई हो। इससे ज्यादा मरीजों के होने पर गंभीर मरीजों पर फोकस कम हो जाता है।
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आबादी के करीब जाकर टेस्ट करने होंगे

प्रो. राजेश कुमार का कहना है कि लोग अभी खुद से टेस्ट नहीं करवा रहे हैं जिन मरीजों में लक्षण दिखते हैं, सिर्फ उन्हीं के टेस्ट हो रहे हैं। लोग भी काफी डरे हुए हैं। उन्हें पता है कि पीजीआई या दूसरे अस्पतालों में टेस्ट करवाना कितना मुश्किल है। ऐसी स्थिति में चंडीगढ़ प्रशासन को डिस्पेंसरी में टेस्ट की व्यवस्था करवानी चाहिए या वैन लेकर सेक्टरों में जाना होगा। जितनी जल्दी संक्रमित व्यक्ति को आबादी में कोरोना फैलाने से पहले रोक लेंगे, उतनी जल्दी इस बीमारी को काबू में किया जा सकेगा। अब तो एंटीजेन टेस्ट की रिपोर्ट भी कुछ देर में मिल रही है। पॉजिटिव आने पर मरीज को होम आइसोलेशन की सुविधा देनी चाहिए। जितनी जल्दी यह प्रयास उठाएंगे, उतनी जल्दी कोरोना पर काबू कर पाएंगे।

दस हजार से कम कंफर्म केस और मौतों की स्थिति
प्रदेश/यूटी              कंफर्म केस             मौतें
चंडीगढ़                 4346                  57
अंडमान-निकोबार      3132                   46
हिमाचल प्रदेश          6116                   38
लद्दाख                   2681                  34
मणिपुर                 6252                   28
मेघालय                2368                   10
नागालैंड                3950                   09
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