चंडीगढ़ में अब कोरोना की स्थिति बेकाबू हो गई है। पिछले एक हफ्ते से रोजाना 200 के आसपास मरीज मिल रहे हैं, जबकि मंगलवार तक मौतों का आंकड़ा 57 तक पहुंच गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, जिन प्रदेश/यूटी में कोरोना के दस हजार से कम केस हैं, उनमें सबसे ज्यादा मौतें चंडीगढ़ में दर्ज की गई हैं। यूटी प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, 57 में से 75 फीसदी तक मौतें सिर्फ अगस्त में हुई हैं। चंडीगढ़ के बिगड़ते हालात पर विशेषज्ञों ने भी चिंता जाहिर की है।
उनका कहना है कि कोरोना को रोकने के लिए अब प्रशासन को युद्ध स्तर पर कदम उठाने होंगे। यदि नहीं चेते तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयानक हो सकती हैं। रोजाना आ रहे पुष्ट केसों की स्थिति में चंडीगढ़ पूरे देश में टॉप पर बना हुआ है और दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों को पीछे छोड़ दिया है। चंडीगढ़ का डेली ग्रोथ रेट 5.1 फीसदी है, जबकि बाकी प्रदेशों की स्थिति इससे नीचे बनी हुई है। दूसरे नंबर पर छत्तीसगढ़ का डेली ग्रोथ रेट 4.9 फीसदी और तीसरे स्थान पर झारखंड है, जिसका ग्रोथ रेट 4.7 फीसदी रिकार्ड किया गया है।
पीजीआई के स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार ने बताया कि ज्यादा मौत आने के पीछे एक कारण टेस्टिंग का कम होना हो सकता है। चंडीगढ़ में प्रति मिलियन 600 से 700 टेस्ट हो रहे हैं। चंडीगढ़ में अभी दूसरे शहरों के मुकाबले टेस्टिंग कम हो रही है। चंडीगढ़ का पॉजिटिविटी रेट भी ज्यादा दर्ज किया जा रहा है। ज्यादा टेस्ट और जल्दी कांटेक्ट ट्रेसिंग से मरीजों का पता जल्दी चलेगा। इससे उन्हें जल्दी आइसोलेट किया जा सकेगा और संक्रमण को रोका जा सकता है।
दूसरा कारण यह भी हो सकता है कि गंभीर मरीज अस्पताल में देरी से दाखिल हो रहे हैं। एक कारण यह भी हो सकता है कि शहर के अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ गई हो। इससे ज्यादा मरीजों के होने पर गंभीर मरीजों पर फोकस कम हो जाता है।