इस तरह के रोगों में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि इस बात का पता कैसे लगाएं कि अपना कोई डिप्रेशन या चिंता के दौर से गुजर रहा है। मानसिक तनाव के बारे में बातें तो होती हैं, मगर इसके लक्षण और उससे बाहर निकलने की चर्चा का इतना प्रचार व प्रसार नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन बीमारियों के भी लक्षण होते हैं पर इन्हें पहचानने के लिए व्यक्ति की दिनचर्या पर नजर रखनी होगी।
ऐसे पहचानें लक्षण
- दोस्त, परिवार और समाज से भी कट जाना
- ज्यादा चिंता करना। हर वक्त नकारात्मक बात करना
- बात-बात पर गुस्सा करना, दुखी रहना
- नींद ज्यादा आना या बहुत कम आना
- पहले ज्यादा बात करता हो और अब बहुत कम कर दिया हो
- खाना ज्यादा खाना या सामान्य से कम खाना
- आत्महत्या जैसे ख्याल का आना
कोरोना के दौरान यह देखने को मिला है कि डिप्रेशन के जो मरीज दवा खाने से ठीक हो गए थे, वह दोबारा से इसकी जद में आ गए हैं। लॉकडाउन से उनके चारों तरफ हताशा व निराशा के ऐसी दीवार खड़ी हो गई, जिससे वह बाहर नहीं निकल पाए। लॉकडाउन में बिजनेस ठप होना, नौकरी जाना, कोरोना संक्रमण का डर, अकेलापन, बाहर आने जाने की आजादी छिन जाने या फिर घर न जा पाने की हताशा की वजह कई लोगों में डिप्रेशन बढ़ा है और आत्महत्या की एक बड़ी वजह डिप्रेशन है। आत्महत्या की कोशिश करने वालों पर हुई एक स्टडी में सामने आ चुका है कि मरने से पहले उन्होंने अपने करीबी दोस्त व पारिवारिक सदस्य से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। इसलिए ऐसे व्यक्तियों के संपर्क में रहे और उनसे बातचीत करते रहें।
- डॉ. सतीश थापर, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, मैक्स हॉस्पिटल
लॉकडाउन के दौरान अलग अलग थानों के अंतर्गत कई आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। इनमें ज्यादातर आत्महत्याएं मानसिक रूप से परेशान या फिर घरेलू कलह की वजह रही है।
- चरणजीत सिंह विर्क, डीएसपी चंडीगढ़ पुलिस