हरियाणा में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों पर अब कोरोना वायरस का ग्रहण लगने लगा है। अधिकतर विकास कार्य ठप हो गए हैं, क्योंकि इन कार्यों में लगे मजदूरों ने एहतियातन काम करना छोड़ दिया है। वायरस के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अधिकतर मजदूर या तो अपने पैतृक घरों को निकल लिए हैं। जबकि कई मजदूरों ने खुद को यहीं अपने स्थानीय ठिकानों में कैद कर लिया है। स्वास्थ्य हालात सामान्य होने के बाद ही अब ये विकास कार्य शुरू हो पाएंगे। हरियाणा में विभिन्न विभागों के अंतर्गत छोटी-बड़ी कई परियोजनाओं पर काम चल रहा हैं।
शहरी स्थानीय निकाय, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, पंचायत विभाग और पीडब्ल्यूडी बीएंडआर ये ऐसे विभाग हैं, जिनकी निगरानी में शहरों और गांवों में विभिन्न विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। शहरी स्थानीय निकाय विभाग के एक अफसर ने बताया कि फिलहाल इन विकास कार्यों की रफ्तार कम हो गई है। उन्होंने बताया कि जिन ठेकेदारों के मार्फत यह विकास कार्य चल रहे थे, उन्हें निर्देश दिए गए थे कि वे अपने मजदूरों के लिए स्वास्थ्य संबंधी गाइडलाइन का पालन करेंगे। सभी मजदूरों को सैनिटाइजर व मास्क उपलब्ध करवाए जाएंगे।
मगर मजदूरों ने इस वायरस के प्रभाव के मद्देनजर फिलहाल काम करना ही बंद कर दिया है। अधिकृत कांट्रेक्टर राजबीर सिंह ने बताया कि ठेकेदार तो मजदूरों से संबंधित स्वास्थ्य गाइडलाइंस का पालन करने को तैयार थे। मगर इस वायरस का खौफ इतना ज्यादा है कि अधिकतर मजदूर काम करने को तैयार नहीं है। उन्होंने बताया कि कंस्ट्रक्शन कामों में लगे अधिकतर मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार व राजस्थान राज्यों के हैं। बहुत से मजदूर रेल सेवाएं बहाली के समय ही अपने पैतृक घरों को निकल गए थे।
जबकि अब चूंकि रेल व बस सेवाएं बाधित हैं, इसलिए कई मजदूरों ने खुद को यहीं अपने स्थानीय घरों में ही सीमित कर लिया। लिहाजा पूरे प्रदेश भर में अधिकतर विकास कार्य ठप पड़े हैं। जन स्वास्थ्य अभियंत्रिकी विभाग के एक आला अफसर के अनुसार प्रदेश में कुछेक परियोजनाएं ऐसी चल रही हैं, जो कि बहुत जरूरी है। मगर अब इन कामों के लिए भी अब पर्याप्त मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं। अभी नए विकास कार्य शुरू नहीं किए जा रहा हैं। हालात सामान्य होने पर ही ये काम आगे बढ़ पाएंगे।