पिता हरकेश चंद और बहन गुरप्रीत के साथ रजनीश शर्मा (बीच में)
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जीएमएसएच-16 की नर्सिंग ऑफिसर रजनीश शर्मा की जिंदगी पिछले 4 महीनों में पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने नवंबर 2019 में बड़े उत्साह के साथ नर्सिंग की जॉब शुरू की थी लेकिन महज 5 महीने बाद ही सामने कोरोना चुनौती बनकर खड़ा हो गया। 25 साल की रजनीश ने कोरोना जैसी जानलेवा बीमारी से टक्कर लेने की ठानी। इस जंग में बड़ी बहन गुरप्रीत शर्मा ने हर कदम साथ दिया।
रजनीश ने कहा कि अपनी बड़ी बहन के प्यार और हिम्मत के बल पर कोरोना के सामने लगातार 4 महीने से डटकर खड़ी हैं। पिता हरकेश चंद शर्मा ने भी पूरा साथ दिया। रजनीश 4 महीने से अस्पताल के कोविड-वार्ड में ड्यूटी कर रही हैं। उनके वार्ड में कोरोना के पॉजिटिव मरीजों को भर्ती किया जाता है। रजनीश का कहना है कि अगर बड़ों का प्यार और आशीर्वाद साथ हो तो कोई भी मुश्किल आसान हो जाती है। अस्पताल में नर्सिंग इंचार्ज सिस्टर शोभना हर पल सहयोग करती हैं। संक्रमण से बचाने के लिए हर छोटी से छोटी जानकारी देती हैं। यही वजह है कि ड्यूटी करना आसान हो जाता है।
डरने से जिंदगी नहीं चलती, आगे बढ़ना पड़ता है
रजनीश ने बताया कि बचपन से ही यह सोचा था कि बड़ी होकर दूसरों की मदद करूंगी। इसके लिए नर्सिंग की पढ़ाई की। जब जीएमएसएच 16 में नौकरी लगी तो ऐसा लगा सपना सच हो गया। नौकरी शुरू होते ही कोरोना महामारी सामने खड़ी हो गई। जब कोरोना के मरीजों के बीच ड्यूटी करने की जानकारी मिली तो मैं काफी डर गई थी लेकिन दीदी ने समझाया कि डरने से जिंदगी नहीं चलती, जीने के लिए हिम्मत के साथ आगे बढ़ना पड़ता है।
उनकी बातों से मेरे अंदर हिम्मत आई और मैंने ड्यूटी करने की हामी भर दी। शुरुआती दौर में पीपीई किट पहनना, पॉजिटिव मरीजों के पास जाना और खुद की सुरक्षा को लेकर सचेत रहना जैसी तमाम तरह की चीजों से रूबरू होना पड़ा लेकिन धीरे-धीरे इसकी आदत हो गई और मुश्किल आसान हो गई।
सजगता ही बचाव का है तरीका
कोरोना से बचाव को लेकर रजनीश का कहना है कि इस महामारी का इलाज उपलब्ध न होने के कारण सजगता ही इससे बचाव का सबसे आसान तरीका है। इसके लिए जरूरी है कि कोरोना से बचाव के मानकों का बेहद सावधानी के साथ पालन किया जाए। मास्क, सैनिटाइजर और ग्लव्स के प्रयोग के साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन कर खुद को इस जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रखा जा सकता है। रजनीश के अनुसार इन मानकों का पालन करते हुए वह और उनके अन्य सहयोगी महीनों से इस बीमारी के सामने डटकर खड़े हैं।