इस बार रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाई की कलाई एक खास किस्म की राखी से सजा सकती हैं। अंजिता भंडारी की बनाई राखियां प्रकृति संरक्षण का संदेश दे रही हैं। हरियाली का दायरा बढ़ाने और उसे बचाने की चाह रखने वाली बहनें भाइयों को बीज से बनीं हुईं राखियां भेज कर प्रकृति को बचाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। इस राखी के जरिए लोगों को प्रकृति संरक्षण को प्रेरित करने वाली कहानियां भी दी जा रही हैं। जिसे पढ़कर लोग राखी को फेंकने के बजाय उसमें लगे बीज को रोपने की प्रेरणा मिलेगी।
चंडीगढ़ की रहने वाली अंजिता भंडारी 11वीं की छात्रा है। लॉकडाउन के दौरान घर में रह रहीं अंजिता ने कुछ बेरोजगार महिलाओं को साथ लेकर सक्षम ग्रुप बनाया। इसमें उन्होंने प्रकृति को बचाने के लिए बीज और सूती धागे का प्रयोग कर राखियां बनाने का काम शुरू किया। अंजिता का यह प्रयास तब सफल रहा जब लोगों ने बीज से बनी उनकी राखियों की प्रशंसा की। लोगों की मांग पर उन्होंने राखियां बनाने का काम शुरू कर दिया। अंजिता ने बताया कि हर साल राखियों के रूप में हम प्लास्टिक को बढ़ावा दे रहे हैं। ऐसे अनचाहे प्लास्टिक पर रोक लगाने के लिए उन्होंने बीज से राखियां बनाने का काम शुरू किया है।
80 रुपये है राखी की कीमत
अंजिता ने बताया कि बीज से बनाई जाने वाली राखियों की कीमत उन्होंने 80 रुपये रखी है। राखियों से मिलने वाले पैसे से वह सक्षम में जुड़ी बेरोजगार महिलाओं की मदद करती हैं, जिससे वह आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्होंने बताया कि राखियों में किचन गार्डन और खजेड़ी के बीजों को लगाया गया है। खजेड़ी की पौध बंजर भूमि को भी हरा भरा कर सकता है।
अंजिता को मदद कर रहे हैं एनजीओ
प्रकृति संरक्षण को बढ़ावा देने वाले अंजिता के प्रयासों को देखकर एनजीओ ने भी मदद को हाथ बढ़ाए हैं। आर्गेनिक शेयरिंग के संचालक राहुल महाजन अंजिता को राखियों के लिए निशुल्क बीज उपलब्ध करा रहे हैं। राहुल महाजन ने बताया कि कम उम्र में ही अंजिता के प्रकृति संरक्षण का प्रयास बेहद सराहनीय है।