पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कोविड -19 के कारण राज्य में कारोबारी सेक्टर, दैनिक वेतन भोगी गरीब कामगारों और बुरी तरह प्रभावित कमजोर वर्गों की मुश्किलों को देखते हुए केंद्र सरकार से व्यापक वित्तीय पैकेज की मांग की है। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को मांगपत्र सौंपते हुए कारोबारी उद्यमों, सूक्ष्म, छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) के साथ-साथ संगठित और गैर-संगठित कामगारों के लिए केंद्र सरकार से आर्थिक मदद की अपील की है।
मुख्यमंत्री ने एमएसएमई और पर्यटन सेक्टर के अलावा स्वास्थ्य, सुरक्षा और फार्मा सेक्टरों के लिए वित्त वर्ष को 31 मार्च से 30 अप्रैल तक तुरंत विस्तार देने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एक्ट -2013 के अधीन हर महीने प्रति व्यक्ति दिए जा रहे पांच किलो अनाज को दोगुना करके 10 किलो किया जाए और इसे तुरंत बांटा जाए। मुख्यमंत्री ने मनरेगा कामगारों को मेहनताना देने के लिए कहा, क्योंकि उनको मनरेगा एक्ट रोजगार के मेहनताना की गारंटी दी जाती है। उन्होंने बताया है कि मनरेगा कामगारों के लिए 15 दिन के लिए 53 करोड़ की राशि की जरूरत है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखे पत्र में सीएम ने कहा कि बहुत कमजोर वर्गों और व्यापार, कारोबार, उद्योग और कृषि और गरीब दिहाड़ीदारों को मदद की जरूरत है। उन्होंने पीएम को कोविड -19 इकनोमिक रिस्पांस टास्क फोर्स का प्रमुख होने के नाते राज्य सरकार के प्रस्तावों पर विचार करने की अपील की ताकि समस्या के साथ पैदा हुई आर्थिक उथल - पुथल को कम किया जा सके।
केंद्र के समक्ष यह रखे प्रस्ताव
- औद्योगिक कर्जों पर ब्याज की दर 2 प्रतिशत घटाई जाए
- पेट्रोलियम, डीजल और सहायक उत्पादों पर एक्साइज और वैट में कम से कम 25 प्रतिशत कटौती हो ताकि पेट्रोल और डीजल की कीमत 9-10 रुपये तक कम हो सकें।
- एमएसएमई की वित्तीय जरूरतों की पूर्ति के लिए 25000 करोड़ रुपये का विशेष फंड।
- प्रभावित समय के लिए कर्जों व सीसी लिमिट पर ब्याज माफ किया जाए।
- जीएसटी रिटर्न की आखिरी तारीख में विस्तार किया जाए।
- पीएफ और ईएसआईसी में मालिकों के योगदान की अदायगी का समय बढ़ाया जाए ।
- पर्यटन और होटल, एविएशन, मैनुफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों के लिए तीन प्रतिशत ब्याज पर आर्थिक सहायता की मांग
- सरहदी जिलों में औद्योगिक इकाइयों के लिए केंद्र के हिस्से का जीएसटी घटाने या छूट देने की मांग।
- गेहूं का आटा, दूध और चावल जैसी जरूरी वस्तुओं के लिए भाड़ा सब्सिडी की मांग।
कामगारों के वेतन का एक तिहाई हिस्सा केंद्र दे
मुख्यमंत्री ने कोरोना के कारण उत्पन्न हुई स्थिति के बीच बंद किए गए एमएसएमईज को सहारा देने के उद्देश्य से यह भी प्रस्ताव दिया है कि अगर औद्योगिक /व्यापारिक संस्था बंद किए जाते हैं तो एमएसएमई यूनिट की तरफ से मुलाजिम को अदा की जाना वाली तनख्वाह का एक तिहाई हिस्सा भारत सरकार अदा करे। इसके अलावा इस वायरस की रोकथाम में सहायक वस्तुओं जैसे कि मास्क, प्रोटेक्टिव सूट, वेंटिलेटर आदि बनाने वाली इकाइयों को तुरंत प्रभाव से लिबरल ओवरड्राफ्ट की सुविधा दी जाए।