देश में कोरोना वायरस पांव पसार रहा है, दूसरी ओर अब मरीजों को इलाज कराने के लिए पुलिस की मदद लेनी पड़ रही है। क्योंकि डॉक्टर इलाज करने से मना कर रहे हैं। एक ओर पूरे देश की चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने और मरीजों को तत्काल इलाज मुहैया कराने पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर चंडीगढ़ में सेक्टर 32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कालेज एंड हॉस्पिटल में इलाज कराने के लिए मरीजों को पुलिस की मदद लेनी पड़ रही है।
शर्मनाक तो यह है कि अस्पताल के जवाबदेह अधिकारी मामले की जानकारी लेने की बजाय खुद के व्यस्त होने की बात कह रहे हैं। मामला बुधवार की सुबह 7 बजे का है, जब विकास नगर निवासी 18 साल की एक लड़की को जीएमसीएच के डॉक्टर ने अस्पताल की इमरजेंसी में यह कहकर इलाज करने से मना कर दिया कि अभी उसकी ड्यूटी खत्म हुई है। मरीज को सांस लेने में परेशानी थी। परिजनों ने दूसरे डॉक्टर से इलाज करने के लिए गुहार लगाई तो उसने सामने एक कागज रख दिया, जिस पर लिखा था मैं अपने मरीज का इलाज यहां नहीं करवाना चाहता।
क्योंकि अस्पताल में इंडोस्कोपी करने के लिए कोई डॉक्टर नहीं है। इस पर परिजनों ने इलाज करने से मना करने की बजाय उस डॉक्टर से मरीज को रेफर करने की बात कही। डॉक्टर इस पर तैयार नहीं हुआ। ऐसा होते-होते सुबह के नौ बज गए। अंत में परिजनों ने हारकर पुलिस से मदद मांगी। कॉल आने पर परिसर स्थित पुलिस चौकी से पुलिस वाले इमरजेंसी पहुंचे और डॉक्टर से इलाज करने को कहा। तब जाकर मरीज का इलाज शुरू हो पाया। मरीज के भाई दीपक ने बताया कि पुलिस के आने के बाद जब मामला सीनियर डॉक्टर तक पहुंचा, तब जाकर इलाज शुरू किया।