कोरोना संक्रमित मरीज की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग लगभग 2 घंटे पहले एडिशनल डिप्टी कमिश्नर को फोन करके सूचना देते हैं। एक घंटे पहले रेडक्रॉस सोसायटी वॉलंटियर को सूचना देती है। वॉलंटियर मौके पर पहुंचकर पहले नाश्ता करते हैं और पानी पीते हैं। पीपीई किट पहनने के बाद संक्रमण के खतरे को देखते हुए वॉलंटियर को पानी तक नहीं मिलता। शव दाह के उपरांत पूरी तरह से सैनिटाइज करने के बाद ही वॉलंटियर कुछ खाते पीते हैं।
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डॉक्टरों ने डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुसार दी ट्रेनिंग
वॉलंटियर के आने के बाद सबसे पहले उनकी सुरक्षा जरूरी थी। सेक्टर 16 स्थित अस्पताल के डॉक्टरों ने तीन दिन तक सभी वॉलंटियर को डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुसार ट्रेनिंग दी। पीपीई किट पहनना व उतारना साथ ही उससे पहले किन मानकों का ध्यान रखना है, इसकी जानकारी दी गई। तब जाकर वॉलंटियर्स को शव उठाने के लिए लगाया गया।
वॉलंटियर में ज्यादातर स्टूडेंट, कर रहे निशुल्क सेवा
शव उठाने के लिए जिन युवाओं को जिम्मेदारी मिली है, उनमें ज्यादातर पहली या दूसरी वर्ष के छात्र हैं। यह सभी वॉलंटियर निशुल्क सेवा कर रहे हैं। ज्यादातर वॉलंटियर पिछले सात साल से रेडक्रॉस से जुड़े हैं। सबसे पुराने वॉलंटियर होने के कारण इन 12 युवाओं का चुनाव किया गया है। देश में चंडीगढ़ एकमात्र ऐसा शहर है, जहां युवाओं की टीम शव उठा रही है। अन्य स्थानों पर स्वास्थ्य विभाग या प्रशासन ही शव उठाने की व्यवस्था कर रहा है।
रेडक्रॉस के पास लिमिटेड स्टाफ होता है। उनसे शव नहीं उठवाए जा सकते हैं। नए स्टाफ को तैनात करना संभव नहीं था। इसलिए रेडक्रॉस के वॉलंटियर से शव उठवाए गए। सभी ने अपनी इच्छा से निशुल्क कार्य किया। ऐसे युवाओं पर नाज होना चाहिए।
- सचिन राणा, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर
मानकों के तहत कर रहे कार्य
युवाओं ने बेहतर कार्य किया है। शव को डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुसार ही श्मशान घाट तक लाया जा रहा है। वहां वॉलंटियर शव को अंदर तक लेकर आते हैं। मानकों के अंतर्गत शवदाह के बाद वॉलंटियर को भी सैनिटाइज करते हैं।
- केके यादव, निगम कमिश्नर
युवाओं ने अपने आपको साबित किया
वास्तव में यह युवाओं के लिए एक बेहतर मौका था। जहां उन्होंने अपने आप को साबित किया। फिलहाल सेक्टर 16 अस्पताल में कोई मौत नहीं हुई है। आगे ऐसी कोई घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी भी इन युवाओं को दी जाएगी।
- डॉ. वीके नागपाल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जीएमएसएच, सेक्टर 16