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महंगाई की दोहरी मार : कोरोना से नौकरी पर संकट, जमापूंजी खर्च, घर चलाने को लेना पड़ रहा कर्ज 

Tue, 23 Feb 2021 03:11 PM IST
निवेदिता वर्मा आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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पहले कोरोना और अब महंगाई से आम आदमी पर दोतरफा मार पड़ी है। कोरोना के दौरान कई लोगों की नौकरी चली गई। जिनकी बची, उनका या तो वेतन कम हो गया या सैलरी उतनी ही रही, जो एक साल पहले थी। वहीं बाजार में चाय की पत्ती से लेकर दवाइयों तक के दाम बढ़ गए। रसोई गैस, खाद्य तेल, दाल, बिस्कुट, ब्रांडेड नमकीन सभी के मूल्यों में इजाफा हुआ है।
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स्कूल की फीस बढ़ने के साथ यातायात भी महंगा हुआ। सबको मिलाकर देखें तो एक घर के खर्च में करीब दस फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। कहने को तो सिर्फ दस फीसदी है, लेकिन इसका बारीकी से आकलन करने पर यह कहीं ज्यादा दिखता है।

एक परिवार का खर्च कितना बढ़ा
एक साधारण परिवार में खर्च का अनुपात ऐसा होना चाहिए कि पूरा खर्च निकालने के साथ वह कुछ पैसा अपने भविष्य के लिए बचा सके। अर्थशास्त्री के मुताबिक अमूमन हर परिवार अपनी कुल आय का 50 फीसदी खर्च रसोई, बिजली, पानी, घर और कपड़े पर खर्च करता है, जबकि 30 फीसदी शिक्षा, परिवहन, स्वास्थ्य, मनोरंजन व अन्य पर। कुल आय का 20 फीसदी वह अपने भविष्य के लिए जोड़ता है। 
अब बात करते हैं 50 फीसदी वाले खर्च पर। पिछले कुछ महीनों के खर्च पर ध्यान देंगे तो 50 फीसदी वाला खर्च (रसोई, मकान, बिजली व पानी) बढ़कर 70 फीसदी पहुंच गया है।

यह इसलिए बढ़ा क्योंकि घी, तेल की कीमत में 30 फीसदी, रसोई गैस में 7 और दालों में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। अब 30 फीसदी वाले खर्च की बात करते हैं। यह भी बढ़कर 40 फीसदी पहुंच गया है। आठ फीसदी की हिसाब से स्कूलों ने फीस बढ़ा दी है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने की वजह से यातायात महंगा हुआ। कुछ दवाइयों के रेट में बढ़ोतरी हुई। अब कुल खर्च की बात करते हैं। 70 और 40 मिलाकर एक परिवार का खर्च 110 फीसदी पहुंच गया है।
 

जमापूंजी खर्च करनी पड़ रही या लेना पड़ रहा कर्ज 
कोरोना से पहले एक परिवार अपनी कुल आय का 20 फीसदी बचा रहा था, जो वह जमापूंजी के तौर पर संभाल कर रख रहा था। लेकिन अब खर्च 110 फीसदी बढ़ गया है तो इसे पूरा करने के लिए जमापूंजी के साथ कर्ज लेना पड़ रहा है। जिसके पास अच्छी खासी जमापूंजी है, उसका तो काम चल रहा है, लेकिन जिसके पास नहीं है, उसके लिए उसे कर्ज लेना पड़ रहा है। अमूमन यह कर्ज लोग क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन से पूरा कर रहे हैं।

खर्च का आकलन 
खर्च                 कोरोना के पहले         कोरोना के बाद

रसोई खर्च            20 फीसदी              32 फीसदी 
बिजली पानी          4 फीसदी                5 फीसदी 
घर                    20 फीसदी              25 फीसदी
कपड़ा                 6 फीसदी                8 फीसदी
शिक्षा                  8 फीसदी                12 फीसदी
परिवहन               8 फीसदी                10 फीसदी
स्वास्थ्य                4 फीसदी                5 फीसदी
मनोरंजन               6 फीसदी                7 फीसदी
अन्य                    4 फीसदी                 6 फीसदी
बचत                  20 फीसदी               00 फीसदी

नौकरीपेशा लोगों का वेतन नहीं बढ़ने से उन पर महंगाई का असर ज्यादा पड़ा है। ऐसी स्थिति में इन लोगों को अपने खर्चे कम करने होंगे। पैसा वहीं खर्च करें, जहां काम न चल पाए। लेकिन लोगों की मांग घटने पर बाजार में निवेश कम होगा। ऐसे में फिर दिक्कत आ सकती है। जब तक वेतन नहीं बढ़ता या महंगाई में गिरावट नहीं आती, तब तक परेशानी बरकरार रहेगी। -डॉ. तिलकराज, अर्थशास्त्री पीयू

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पिछले छह महीने में किन चीजों के कितने दाम बढ़े
  • चाय की पत्ती               50-60 फीसदी
  • घी-तेल                        25 फीसदी
  • दाल                           20 फीसदी
  • साबुन                        15-20 फीसदी
  • मसाले                        20-25 फीसदी
  • रसोई गैस                    सात फीसदी
  • पेट्रोल                          24 फीसदी

स्थिति गंभीर है। आमदनी बढ़ी नहीं और खर्च बढ़ गया। वेतन पर निर्भर रहने वाले परिवार के सामने ज्यादा विकल्प नहीं है। ऐसे में उन्हें खर्च पर कटौती करनी होगी और थोड़ा इंतजार करना होगा। इस साल का बजट फौरी तौर पर कोई असर नहीं डालेगा, लेकिन एक वक्त के बाद इसका सकारात्मक असर दिख सकता है। -कपिल सभ्रवाल, सीए व पूर्व अध्यक्ष चंडीगढ़ ब्रांच आफ आईसीएआई ऑफ इंडिया

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