पैसे लेकर भी तय समय पर फ्लैट का कब्जा न देने वाली डेवलपर कंपनी को एक-एक हजार रुपये प्रतिदिन की दर से दो शिकायतकर्ताओं को मुआवजा देना होगा।
उपभोक्ता आयोग ने माना कि समय पर फ्लैट न देकर कंपनी ने शिकायतकर्ताओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। इसलिए डेवलपर को एक अप्रैल 2011 से 31 मई 2014 तक का मुआवजा देना होगा। साथ ही जब तक फ्लैट का कब्जा नहीं दिया जाता, तब तक एक हजार रुपये प्रतिदिन और 20-20 हजार रुपये मुकदमा खर्च देना होगा।
यह फैसला राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष रिटा. जस्टिस शाम सुंदर और सदस्य देवराज ने सुनाया।
आयोग ने मामले को एकतरफा करार दिया
गुड़गांव के सेक्टर-56 के अलकनंदा हाउसिंग सोसाइटी निवासी राजीव कपूर और सेक्टर-54 न्यू शिमला हिमाचल प्रदेश (वर्तमान पता-थाना रोड मंडी) निवासी करुणा वैद्य ने मोहाली स्थित चंडीगढ़ ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड और इसके डायरेक्टर हरदयाल सिंह मान के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दी थी।
डेवलपर की ओर से पक्ष नहीं रखने पर आयोग ने मामले को एकतरफा करार दिया। आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के अंदर आदेश का पालन नहीं करने पर डेवलपर को सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से भी भुगतान करना होगा।
उपभोक्ता कोर्ट की ली थी शरण
राजीव कपूर ने अपने नाम से मोहाली के ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड में रेजिडेंशियल फ्लैट के लिए 12 दिसंबर 2009 को आवेदन किया। फ्लैट की कीमत 27 लाख थी। उन्होंने 31 दिसंबर 2009 तक तय कीमत का भुगतान कर दिया।
उन्हें फ्लैट नंबर 601 टावर एक में अलाट किया गया था। बायर डेवलपर एग्रीमेंट 14 दिसंबर 2009 को हुआ, जिसमें 31 मार्च 2011 तक पूरा होने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन डेवलपर समय पर फ्लैट का कब्जा देने में नाकाम रहा। वहीं, दूसरे मामले में करुणा वैद्य ने अपने नाम से रेजिडेंशियल फ्लैट के लिए भी 31 दिसंबर 2009 तक पूरा भुगतान कर दिया था।
उन्हें फ्लैट नंबर 701 टावर एक में अलॉट किया गया। साथ ही प्रोविजनल अलाटमेंट लेटर दिया गया। लेकिन, डेवलपर उन्हें भी समय पर फ्लैट का कब्जा देने में नाकाम रहा।