एफडी की मैच्योरिटी के बाद कैश करने में देरी को सेवा में खामी मानते हुए उपभोक्ता अदालत ने आईसीआईसीआई बैंक को ग्राहक को 40 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता अदालत में बताया कि उसने बैंक ऑफ राजस्थान में एफडी खोली और रिन्यू करवाई थी। एफडी के मैच्योर होने के बाद जब इसे कैश करने के लिए दावा किया गया तो बैंक ने उसे यह कहते हुए भुगतान नहीं किया कि हस्ताक्षर किए हुए दस्तावेज उनके पास मौजूद नहीं हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि लगातार फॉलोअप की प्रक्रिया में उन्हें शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना और पीड़ा का सामना करना पड़ा है। बैंक ने ई-मेल/पत्रों आदि के आदान-प्रदान के बावजूद शिकायतकर्ता की शिकायतों का निवारण नहीं किया। यह भी आरोप लगाया गया है कि दो एफडीआर के भुगतान में देरी और तीसरी एफडीआर का भुगतान न करने के कारण उन्हें ब्याज के कारण वित्तीय नुकसान हुआ है और इस तरह वे 12 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से ब्याज के हकदार हैं।
मामले में बैंक की ओर से भी स्वीकार किया गया कि राशि जारी करने में कुछ देरी हुई थी, लेकिन यह भी कहा गया कि एफडीआर आईसीआईसीआई बैंक में बैंक ऑफ राजस्थान के विलय से पहले की अवधि के हैं और शिकायतकर्ताओं के हस्ताक्षर इसमें अपलोड नहीं किए गए हैं।
मूल रूप से शिकायतकर्ताओं ने बैंक ऑफ राजस्थान में एफडीआर के रूप में राशि जमा की थी। इसलिए एफडीआर के हस्ताक्षरों के साथ उनके हस्ताक्षरों को सत्यापित करने में कुछ समय व्यतीत हो गया और इस प्रकार, शिकायतकर्ताओं को एफडीआर की राशि जारी करने में कुछ देरी हुई है। उपभोक्ता आयोग ने कहा कि दस्तावेजों को ठीक से और सुरक्षित रखना बैंक का कर्तव्य है न कि ग्राहक का। देय तिथि पर भुगतान न करना भुगतान से इनकार करने के बराबर है। शिकायतकर्ताओं को परिपक्वता तिथि के चार महीने के बाद यानी 17 नवंबर 2019 को तीन में से दो एफडीआर का भुगतान किया गया था। वह भी शिकायतकर्ता द्वारा काफी प्रयासों और बैंक को कई इमेल भेजने के बाद हुआ।
मामले में सामने आए तथ्यों और बयानों के आधार पर उपभोक्ता आयोग ने यह निष्कर्ष निकाला कि शिकायतकर्ता को एफडीआर की राशि जारी करने में कुछ देरी हुई है, जिसके लिए वे विलंबित अवधि के लिए ब्याज के साथ साथ मुआवजे के हकदार हैं। इसके बाद आयोग ने शिकायतकर्ता को हुए शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के साथ मुकदमे के खर्च के तौर पर एकमुश्त 40 हजार रुपये बतौर मुआवजा राशि भुगतान करने के आदेश दिए।