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कांग्रेस का बड़ा फैसला: नगर परिषद और पालिका चुनाव पार्टी चिन्ह पर नहीं लड़ेगी, पुरानी परिपाटी पर कायम

Tue, 31 May 2022 06:51 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

कांग्रेस ने पुरानी परिपाटी पर चलने का निर्णय लिया है। पूर्व की तरह ही इस बार भी सभी नेता अपने क्षेत्रों में बिना चिन्ह के ही समर्थित उम्मीदवार उतारेंगे।
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हरियाणा कांग्रेस की बैठक। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा में 19 जून को होने वाले 18 नगर परिषद और 28 नगर पालिकाओं के चुनाव कांग्रेस पार्टी चिह्न पर नहीं लड़ेगी। मंगलवार को चंडीगढ़ में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा के निवास पर हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। प्रदेश प्रभारी विवेक बंसल इस दौरान मौजूद रहे। प्रदेशाध्यक्ष उदयभान ने नेताओं, कार्यकर्ताओं को भाजपा उम्मीदवारों के खिलाफ मजबूती और एकजुटता से लड़ने का आह्वान किया है।

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बीते दिनों दिल्ली में 15 जीआरजी रोड पर हुई बैठक में अनेक विधायकों ने पार्टी चिन्ह पर चुनाव लड़ने का सुझाव दिया था। उसके बाद हुड्डा, बंसल और उदयभान अधिकृत किए गए थे कि हाईकमान से विचार-विमर्श कर अंतिम निर्णय लें। उदय भान ने बताया कि निकाय चुनावों को लेकर 31 मई को हुई बैठक में विवेक बंसल, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा, कार्यवाहक अध्यक्ष जितेंद्र भारद्वाज व रामकिशन गुर्जर, विधायक किरण चौधरी सहित चुनाव क्षेत्र के हलकों के विधायक उपस्थित रहे हैं।

विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया कि नगर परिषद और पालिकाओं के चुनाव सिंबल पर नहीं लड़े जाएंगे। इससे पहले भी नगर परिषद और नगर पालिका के चुनाव पार्टी अपने सिंबल पर नहीं लड़ती है और इस बार भी नहीं लड़ेगी। हालांकि, नगर निगम के चुनाव पार्टी सिंबल पर लड़े जाएंगे। भाजपा उम्मीदवारों को हराने का काम कांग्रेस नेता करें। पार्टी समर्थित मजबूत उम्मीदवारों को उतारा जाए। गठबंधन सरकार से हर वर्ग निराश हैं। नगर परिषद व पालिका के चुनाव भाईचारे के होते हैं, इसलिए इन चुनाव को सिंबल पर नहीं लड़ा जाएगा।
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पुरानी परिपाटी पर ही चली कांग्रेस
कांग्रेस ने पुरानी परिपाटी पर चलने का निर्णय लिया है। पूर्व की तरह ही इस बार भी सभी नेता अपने क्षेत्रों में बिना चिन्ह के ही समर्थित उम्मीदवार उतारेंगे। ऐसे में मुकाबला भाजपा, आप, जजपा, इनेलो और कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों व निर्दलीयों के बीच होगा। चिन्ह पर लड़ने की पैरवी कर रहे विधायकों को पार्टी के फैसले से निराशा हाथ लगी है।   

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