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SYL पर कांग्रेस ने दी चेतावनी, राष्ट्रपति से भी की खास अपील

Mon, 28 Nov 2016 01:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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सतलुज यमुना लिंक नहर - फोटो : फाइल फोटो
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प्रदेश कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि राज्य को पानी से वंचित करना गंभीर नतीजों का कारण बन सकता है। इसके चलते प्रदेश में आतंकवाद दोबारा सिर उठा सकता है। कांग्रेस ने राष्ट्रपति से एसवाईएल पर कोई फैसला लेने से पहले जमीनी हकीकत पर विचार करने की अपील की है।
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पंजाब सीएम प्रकाश सिंह बादल और हरियाणा के सर्वदलीय शिष्टमंडल के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के साथ प्रस्तावित मुलाकात के एक दिन पहले कांग्रेस ने यह अपील की है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसवाईएल पर फैसले के कुछ दिन बाद प्रदेश कांग्रेस का दल कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में राष्ट्रपति को ज्ञापन भी दे चुका है। 

इसमें सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर कार्रवाई न करने के निर्देश देने की अपील की गई थी। कांग्रेस नेताओं सुनील जाखड़ व मनप्रीत बादल ने कहा कि पानी से वंचित होना राज्य में बड़े स्तर पर हिंसा या आतंकवाद के दोबारा सिर उठाने का कारण बन सकता है।
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 उन्होंने राष्ट्रपति से अगली कार्रवाई से पहले पंजाब में पानी की उपलब्धता की जमीनी हकीकत पर विचार करने की अपील की। इसके लिए नए सिरे से एक ट्रिब्यूनल गठित किया जाना चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने राष्ट्रपति से कहा कि वह केंद्र सरकार को अंतरराज्यीय पानी के बंटवारे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त राइपेरियन सिद्धांतों को मानने को निर्देश दें। 
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'पानी से वंचित किए जाने पर फिर सिर उठा सकता है आतंकवाद'

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी - फोटो : ‌file photo
पंजाब में गिरते भूजल स्तर और पानी की उपलब्धता के मद्देनजर इस मुद्दे पर कदम उठाने से पहले सभी तथ्यों पर विचार किया जाना चाहिए। राइपेरियन राज्य न होने के कारण हरियाणा व राजस्थान सतलुज व ब्यास के पानी पर दावा नहीं कर सकते। 

पंजाब के पास दूसरे राज्यों के साथ बांटने के लिए पानी नहीं है। हिमालय में ग्लेशियरों के लगातार पिघलने से पानी सप्लाई का स्तर लगातार गिर रहा है। नदियों का पानी 14.37 एमएएफ से गिर कर 13 एमएएफ पहुंच चुका है। 

पंजाब में पानी की मांग पूरी नहीं हो रही अगर पानी संकट को आगे बढ़ने दिया तो हालात विस्फोटक हो सकते हैं, राज्य में हिंसा हो सकती है। अगर रावी-ब्यास के पानी को मोड़ने की इजाजत दी गई तो एक मिलियन एकड़ जमीन बंजर हो जाएगी। 

दो लाख से ज्यादा किसान और इतने ही मजदूर अपनी आजीविका खो बैठेंगे। कांग्रेस नेताओं ने राष्ट्रपति से अपील की कि कोई भी फैसला लेने से पहले लोगों को बड़े स्तर पर पेश आ रही समस्याओं पर विचार करें।  
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