विधानसभा चुनाव को लेकर सूबे में कांग्रेस पूरी तरह से संजीदगी बरतने के मूड में हैं। लोकसभा चुनाव में हरियाणा में कांग्रेस के साथ जो कुछ हुआ, कांग्रेस हाईकमान उसे बिल्कुल भी दोहराना नहीं चाहती। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में सूबे में लोस की कुल 10 सीटों में से कांग्रेस को केवल एक ही सीट मिली थी।
अन्य सभी सीटों पर कांग्रेस को भाजपा की आंधी के साथ-साथ ‘अपनों’ की गुटबाजी की मार झेलनी पड़ी थी। केवल रोहतक लोकसभा सीट ही ऐसी थी, जिस पर सीएम के बेटे दीपेंद्र हुड्डा का नाम आने के बाद गुटबाजी न के बराबर थी।
अब सूबे में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं लेकिन चुनाव में कांग्रेस गुटबाजी की वजह से एक बार फिर मात खाने की कहानी को दोहराना नहीं चाहती है। अंबाला में भी लोकसभा क्षेत्र (अंबाला, पंचकूला, कालका, यमुनानगर) की सभी नौ विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस पिछले लोस चुनाव में गुटबाजी की मार झेल चुकी है।
इन सभी हलकों में कांग्रेस की करारी हार हुई थी इसीलिए कांग्रेस को सूबे के हर हलके में ऐसे प्रत्याशी की तलाश है, जिसके नाम पर कांग्रेस की गुटबाजी खत्म हो जाए। यही वजह है कि सभी हलकों से दावेदारों के नाम आने के बावजूद भी प्रत्याशियों की घोषणा करने में कांग्रेस हाईकमान को वक्त लग रहा है।
दावेदारों की भरमार, इसीलिए गुटबाजी का डर
विधानसभा चुनाव में दावेदार सीमित रहें और गुटबाजी के आसार भी कम रहें, इसीलिए कांग्रेस हाईकमान ने इस बार दावेदारों से 500 रुपये का फार्म और साथ में 10 हजार रुपये की आवेदन राशि भरवाई लेकिन उसके बावजूद भी हालात यह रहे कि दावेदारों की टोली कम होने के बजाय बढ़ती ही गई।
इस बार जिले के कुल चार विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ने के लिए कुल 51 दावेदारों ने ताल ठोंकी है जबकि सूबे की 90 विधानसभा क्षेत्र से कुल 1200 दावेदार मैदान में हैं। इसमें सबसे ज्यादा 108 दावेदार यमुनानगर में हैं और सबसे कम 14 दावेदार पलवल से हैं।
दावेदारों की बढ़ी इसी फौज को लेकर अब कांग्रेस इस बात से बेहद चिंतित है कि टिकट वितरण के बाद कहीं फिर से आपस में गुटबाजी मुखर न हो जाए और इसका नुकसान पार्टी को न हो जाए।
आकाओं का दामन थामे बैठे दावेदार
जिले के चार विधानसभा क्षेत्र अंबाला कैंट, अंबाला सिटी, नारायणगढ़ और मुलाना विधानसभा क्षेत्रों में सभी 51 दावेदार टिकट के लिए अपने-अपने आकाओं का दामन थामे बैठे हैं लेकिन टिकट केवल चार लोगों को ही मिलना है।
अब हाईकमान की टेंशन यह है कि 51 में से यदि 4 को टिकट दिया जाता है तो शेष बचे 47 दावेदारों को कैसे मनाया जाएगा, इसीलिए प्रत्याशी ऐसे चुने जाने हैं, जिनके नाम पर गुटबाजी खत्म हो जाए। कांग्रेस हाईकमान अभी तक टिकट वितरण में देरी कर रहा है और दावेदारों की बैचेनी बढ़ती जा रही है।