हरियाणा कांग्रेस आदमपुर उपचुनाव में हार की जल्दी समीक्षा करेगी। चुनाव नतीजों को प्रदेशाध्यक्ष उदयभान ने संतोषजनक बताया है। अभी नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा व उनके साथ पांच अन्य बड़े नेता हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में व्यस्त हैं। हुड्डा की आलाकमान ने आदमपुर चुनाव के कारण हिमाचल में प्रचार के लिए डयूटी नहीं लगाई थी, लेकिन व्यक्तिगत संबंधों के चलते वह उपचुनाव से फारिग होते ही प्रचार के लिए पड़ोसी राज्य पहुंच गए हैं।
उनके लौटने और हरियाणा में पंचायती राज चुनाव संपन्न होने के बाद कांग्रेस हार की समीक्षा के लिए बैठक बुलाएगी। प्रदेशाध्यक्ष उदयभान ने कहा कि आदमपुर में कांग्रेस ने जीरो से शुरू किया। पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल और उनके परिवार के कारण आदमुपर में कांग्रेस का कोई और नेता तैयार नहीं हुआ।
कुलदीप बिश्नोई के भाजपा में जाने के बाद कांग्रेस ने मजबूती से नई शुरूआत की है। उपचुनाव के नतीजों ने भाजपा और कुलदीप बिश्नोई की कलई खोलकर रख दी। कांग्रेस ने सत्तारूढ़ दल के दबाव के बावजूद एतिहासिक प्रदर्शन किया।
कुलदीप के कांग्रेस छोड़ने के बाद भी पार्टी कमजोर नहीं हुई है। बेशक कांग्रेस यह चुनाव हार गई है, लेकिन बिना भजनलाल परिवार के बाद दूसरी बार आदमपुर के रण में उतरी कांग्रेस ने अपने वोटों में 5 गुना की बढ़ोतरी की है। 2019 में कांग्रेस के टिकट पर लगभग 30,000 वोटों के अंतर से जीतने वाले बिश्नोई परिवार की जीत का मार्जिन अब आधा हो गया है। बिना बिश्नोई परिवार के कांग्रेस उम्मीदवार को लगभग 52 हजार वोट हासिल हुईं।
भाजपा और कुलदीप बिश्नोई को पता है कि उपचुनाव की जीत में भी उनके लिए 2024 की हार का संदेश छिपा हुआ है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जयप्रकाश जेपी पर हमले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिले। उदयभान ने कांग्रेस को वोट देने वाले मतदाताओं समेत सभी आदमपुरवासियों का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि उपचुनाव में कांग्रेस को 36 बिरादरी का समर्थन प्राप्त हुआ।
आदमपुर उपचुनाव से पार्टी को लेनी होगी सीख : सैलजा
आदमपुर उपुचनाव के नतीजों के बाद हरियाणा कांग्रेस में निशाना साधने का काम शुरू हो गया है। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा ने कहा है कि उपचुनाव से पार्टी को सीख लेनी होगी। कांग्रेस कुछ लोगों तक सीमित नहीं रह सकती। सैलजा ने सोमवार को दिल्ली में यह बयान दिया। आदमपुर उपचुनाव के नतीजे काफी निराशाजनक हैं। इसे लेकर पार्टी प्लेटफार्म पर समीक्षा होगी। कांग्रेस ने यह चुनाव किस तरीके से लड़ा इसका आंकलन होना जरूरी है। अगर सबक नहीं लिया गया तो 2024 विधानसभा चुनाव में नुकसान हो सकता है।
उपचुनाव में पार्टी के सभी नेताओं को एकजुट होकर एक मंच पर दिखना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कुछ नेता यह भूल रहे हैं कि कांग्रेस 36 बिरादरी की पार्टी है। कांग्रेस चंद लोगों तक सीमित नहीं रहेगी। भाजपा ने जनता को निराश किया है, लेकिन कुछ लोग कांग्रेस पार्टी को उसका फायदा नहीं उठाने दे रहे।
सैलजा के इन तेवरों से साफ है कि नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा को उनके विरोधी आलाकमान के समक्ष घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। विधायक किरण चौधरी पहले ही उम्मीदवार के चयन और प्रचार के लिए न बुलाने को लेकर सवाल उठा चुकी हैं। राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सुरजेवाला भी आदमपुर उपचुनाव से पूरी तरह दूर रहे, चूंकि वह राहुल गांधी की कर्नाटक में चल रही भारत जोड़ो यात्रा में व्यस्त थे। अब यह तीनों नेता आदमपुर की हार को लेकर आलाकमान को क्या फीडबैक देते हैं, यह देखना होगा।