आप विधायक रूपिंदर रूबी ने सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह से मिल कर बठिंडा में बारिश से हुए नुकसान का मुद्दा उठाया। अपने मांग पत्र में उन्होंने कहा कि बारिश से बठिंडा देहाती हलके में काफी तबाही मची है। जिसके लिए मुआवजा दिया जाए क्योंकि किसान फसलों पर 10-15 हजार रुपये प्रति एकड़ खर्च कर चुके थे। जिन्होंने जमीन ठेके पर ली थी, उनका और ज्यादा नुकसान हुआ है। अभी तक गिरदावरी न होने के कारण किसानों को फसल बीजने में दिक्कत आ रही है।
मुद्दों से भाग रही है कैप्टन सरकार - चीमा
नेता प्रतिपक्ष हरपाल चीमा ने आरोप लगाया है कि कैप्टन सरकार लोगों के ज्वलंत मुद्दों को सुनने को तैयार नहीं है। एक भी चुनावी वादा पूरा न कर सकी सरकार इनसे भाग रही है। चीमा ने बताया कि आप विधायकों ने स्पीकर राणा केपी सिंह से मिल कर विभिन्न मुद्दों पर बहस के लिए सत्र का समय बीस दिन करने की मांग की थी।
यह मांग बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में भी उठाई थी। भूजल संकट, दरियाई पानी, खेती संकट, किसानी कर्ज, आत्महत्याएं, बेरोजगारी, नशे समेत तमाम मुद्दों पर चर्चा जरूरी है। पार्टी मासूम फतेहवीर और संत बाबा लाभ सिंह को श्रद्धांजलि देने का स्वागत करती है। पर बेरोजगारी के कारण आत्महत्या करने वाले जगसीर सिंह को श्रद्धांजलि न देकर दलितों का अपमान किया गया है।
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अपील पर सहमति जताते हुए पंजाब की सभी राजनीतिक पार्टियों ने श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व से संबंधित मुख्य समारोह को सफल बनाने के लिए सरकार का समर्थन किया है।
विधानसभा के मानसून सत्र के आगाज के बाद सभी पार्टियों के विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ आयोजित मीटिंग में यह मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री ने सभी को पार्टीबाजी से ऊपर उठकर इस महान समारोह के लिए समर्थन देने की अपील की।
इस मौके पर शिरोमणि अकाली दल, भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी सहित सभी राजनीतिक पार्टियों ने राज्य सरकार को सहयोग देने का भरोसा दिलाया, जो नवंबर में मनाए जा रहे मुख्य समारोह के लिए नोडल एजेंसी है। सरकार की तरफ से साल भर आयोजित किए जाने वाले समारोहों के मुकम्मल होने के अवसर पर यह मुख्य समारोह आयोजित किया जाएगा।
पंजाब विधानसभा का शुक्रवार को शुरू हुआ मानसून सत्र का पहला दिन दिन सिर्फ 14 मिनट चला। सत्र सेशन दोपहर दो बजे शुरू हुआ और 2 बजकर 14 मिनट पर सोमवार तक के लिए स्थगित हो गया। पहले दिन दिवांगत प्रसिद्ध शख्सियतों को श्रद्धांजलि भेंट की गई।
सदन ने संगरूर जिले में बोरवेल में गिरने के कारण मौत का शिकार हुए दो वर्षीय फतेहवीर सिंह को श्रद्धांजलि भेंट की। साथ ही, सदन ने पुलों वाले बाबा के नाम से प्रसिद्ध रहे बाबा लाभ सिंह को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। सदन ने कांग्रेस नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के निधन पर और 1992-1998 तक राज्यसभा के सदस्य रहे वरिंदर कटारिया को भी श्रद्धांजलि भेंट की।
बठिंडा से 1967 में सांसद रहे किक्कर सिंह, 1992 में शुतराना हलके से चुने गए विधायक व पूर्व मंत्री हमीर सिंह घग्गा, पूर्व सीपीएस और पूर्व विधायक चौधरी नंद लाल, पंजाब विधानसभा की पूर्व सदस्य स्नेह लता, पूर्व विधायक कामरेड बलवंत सिंह, परमजीत सिंह और करनैल सिंह डोड को भी श्रद्धांजलि भेंट की गई।
इनके साथ ही, स्वतंत्रता संग्रामी गुरमेज सिंह, कुलवंत सिंह, ईशर सिंह, उजागर सिंह, जंगीर सिंह, संता सिंह और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य जत्थेदार लखवीर सिंह को भी सदन ने याद किया। प्रसिद्ध शख्सियतों का जिक्र करने के बाद सदन ने शोक प्रस्ताव पारित किया। दिवंगत आत्माओं के सत्कार के तौर पर सदन में दो मिनट का मौन रखा गया।
पंजाब विधानसभा के मानसून स्तर में हिस्सा लेने की जगह पर नवजोत सिंह सिद्धू शुक्रवार को अपने घर में ही समर्थकों से मिलते रहे। निकाय मंत्री के नाते विधानसभा में नशे और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अपने विरोधियों सुखबीर बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया को घेरने वाले सिद्धू की दहाड़ इस बार विधानसभा में नहीं गूंजेगी।
सिद्धू जब सांसद थे, तब भी वह लोकसभा के सत्र में नहीं पहुंचते थे। 2009 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद सिद्धू बॉलीवुड और क्रिकेट कमेंट्री में इतने व्यस्त हो गए कि उन्होंने अपने लोकसभा हलके के 13 लाख से अधिक मतदाताओं से मुंह मोड़ लिया था।
अब के सीनियर डिप्टी मेयर रमन बख्शी ने उस समय सिद्धू के लापता होने के पोस्टर पूरे शहर में चिपका दिए थे। उसके बाद सिद्धू गुरु नगरी में पहुंचे हालांकि कुछ दिन बाद वह फिर लौट गए थे। मंत्री होने के नाते सिद्धू ने विधानसभा में कई बार ऐसे मुद्दे भी उठाये जिन्होंने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुश्किल में डाल दिया था।
सिद्धू एक विधायक के नाते अपने हलके के लिए सरकार से क्या मांग करते है, इस पर उनके समर्थक पार्षदों की नजरें टिकी हुईं थीं, लेकिन विधानसभा के सत्र में हिस्सा न लेकर एक बार फिर अपने हलके की आवाज बनने से किनारा कर लिया है। सिद्धू के स्वभाव में शामिल है कि जब भी वह खुद को बैक सीट पर पाते हैं तो खुद को पीछे कर लेते हैं। विधान सभा सत्र में हिस्सा न लेना सिद्धू की दबाव बनाने की राजनीति का हिस्सा है, इसका फैसला समय करेगा।
सिद्धू व्यस्त भी है तो विधानसभा में आएं : डॉ. राजकुमार
विधायक डॉ. राजकुमार ने कहा कि विधानसभा सत्र में शामिल होना नवजोत सिद्धू की जिम्मेदारी है। यदि वह किसी काम में व्यस्त हैं तो भी विधानसभा सत्र में अपनी हाजिरी यकीनी बनाएं।