2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी इतिहास से सबक लेकर चुनावी पटकथा लिख रही है। सत्ता हासिल करने के लिए पार्टी आलाकमान विपक्षी दलों के दिग्गज नेताओं को उनके हलकों में ही घेरने की रणनीति बना रहा है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के हाल ही में कराए गए सर्वे में मनमाफिक परिणाम नहीं आने के बाद पार्टी आलाकमान 2014 में हुए आम चुनाव की रणनीति को इस चुनाव में लागू करना चाह रहा है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के एक वर्ग द्वारा अपनी विधानसभा सीटों पर शीर्ष विपक्षी नेताओं के खिलाफ पार्टी को भारी टक्कर देने का प्रस्ताव पहले भी पार्टी आलाकमान को दिया जा चुका है। इस पर आलाकमान ने भी अपनी सहमति जताई थी। हालांकि कांग्रेस में चल रही उठापटक के कारण यह मांग दब गई थी लेकिन अब एक बार फिर से धीरे-धीरे यह मांग जोर पकड़ने लगी है।
इस मांग के पीछे एक बड़ी वजह यह भी रही है कि अंदरूनी कलह और सत्ता विरोधी लहर का सामना करते हुए पार्टी के पर्यवेक्षकों ने यह सुझाव दिया था कि 2022 के चुनाव में पार्टी को बचाए रखने का एकमात्र तरीका विपक्षी दलों के दिग्गजों के सामने पार्टी के हैवीवेट नेताओं को खड़ा कर उन्हें उनके हलकों में ही चुनौती दी जाए।
उन्होंने कहा था कि जहां तक चुनावी रणनीति तैयार करने का सवाल है, पार्टी को वर्तमान हालात को देखते हुए कुछ हटकर सोचने की जरूरत है। सर्वेक्षण रिपोर्ट पार्टी के लिए एक अच्छी तस्वीर नहीं पेश करती है। पर्यवेक्षकों ने कहा था कि जलालाबाद में सुखबीर बादल या मजीठा में बिक्रम सिंह मजीठिया जैसे बड़े नामों को हराने के लिए यह फार्मूला बेहद कारगर होगा। इसके बाद पंजाब कांग्रेस के भी कुछ नीति निर्धारण करने वाले नेताओं ने इस सुझाव पर अपनी मुहर लगाई थी और 2014 के आम चुनाव का उदाहरण भी दिया था।
क्या थी 2014 चुनाव की रणनीति
2014 के आम चुनाव में कैप्टन अमरिंदर सिंह, प्रताप सिंह बाजवा, सुनील जाखड़ और अंबिका सोनी को चुनाव लड़ने के लिए मजबूर किया गया था। ये सभी नेता चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं थे। कैप्टन ने सोनिया गांधी से यहां तक कह दिया था कि उन्हें राज्य की राजनीति में ज्यादा दिलचस्पी है। इसके बाद भी सोनिया गांधी ने उन्हें अमृतसर से नामांकन पत्र दाखिल करवाया था।
इसी तरह प्रताप बाजवा के दावे को खारिज कर उन्हें गुरदासपुर से भाजपा के दिग्गज विनोद खन्ना के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए कहा गया। इसी तरह, पूर्व केंद्रीय मंत्री अंबिका सोनी और पूर्व पीपीसीसी प्रमुख सुनील जाखड़ को क्रमश: श्री आनंदपुर साहिब और फिरोजपुर से लड़ने के लिए मनाया गया था। यह रणनीति बेहद कारगर रही थी, पार्टी को इससे काफी फायदा भी हुआ था।