मंगलवार को केपी को टिकट मिल गया और वहां से कांग्रेस ने प्रत्याशी बदल दिया है, इसका पूरा शोर जालंधर में मच गया। नामांकन दाखिल करने का आखिरी दिन था, लिहाजा तैयार होकर केपी अपने चहेतों के साथ नगर निगम पहुंचे लेकिन इससे पहले वहां पर सुखविंदर कोटली खड़े थे। कोटली भी अथॉरिटी लेटर का इंतजार कर रहे थे। घड़ी की सूईयां तेजी से आगे दौड़ती जा रही थीं और दो बजकर 45 मिनट हो गए थे।
केपी अपनी फाइलें को लेकर अधिकारी के पास पहुंचे। कागजात दाखिल करने लगे और कहा कि उनका अथॉरिटी लेटर आ रहा है। तब तक दस्तावेज जमा कर लिए जाएं। कांग्रेस प्रत्याशी सुखविंदर कोटली भी पूरी तरह से आश्वस्त थे कि अथॉरिटी लेटर उनको ही मिलेगा। पौने तीन बजे अचानक कोटली दौड़ते हुए पार्किंग पहुंचे और वहां एक गाड़ी आकर रुकी। जिसमें से वह पीले रंग का लिफाफा लेकर दौड़ते कार्यालय आए तो कांग्रेस जिंदाबाद व सुखविंदर कोटली जिंदाबाद के नारे लगने लगे। नारों का शोर केपी के कानों में पड़ा तो उन्होंने कांग्रेस के दिग्गजों को फोन मिलाया लेकिन किसी ने नहीं उठाया। आखिरकार केपी सारा मामला समझ गए और अपनी फाइल उठाकर लौट गए।
केपी मेरे पिता की तरह, उनका आशीर्वाद लेकर चलूंगा: कोटली
15 मिनट पहले अथॉरिटी लेटर पाने वाले सुखविंदर कोटली ने कहा कि केपी उनके पिता समान है, वह उनका आशीर्वाद लेकर ही चलेंगे। उधर, मोहिंदर केपी ने कहा कि कांग्रेस हाईकमान के नेता मेरा फोन नहीं उठा रहे हैं। मेरे साथ धोखा व गलत किया गया है। कल रात मुझे आधिकारिक रूप से कहा गया कि टिकट आपको दिया जा रहा है।
आदमपुर में रोचक हो गया मुकाबला
आदमपुर में मुकाबला रोचक हो गया है। वहां से विधायक पवन कुमार टीनू व सुखविंदर कोटली दोनों बसपा के मिशनरी नेता रहे हैं। टीनू ने अकाली दल का दामन थाम लिया था, जबकि कोटली अब कांग्रेस में आ गए हैं। कांग्रेस से सुखविंदर कोटली को ही प्रत्याशी बनाने से विधानसभा हलका आदमपुर में विपक्षी दलों के सामने खासी चुनौती खड़ी हो गई है। अकाली दल-बसपा के लिए भी इस सीट को जीत पाना अब पूर्व की भांति आसान नहीं होगा। सुखविंदर कोटली बसपा से ही अलग हुए हैं और बसपा के कैडर में ही सेंध लगाएंगे जो सीधे तौर पर अकाली-बसपा प्रत्याशी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।