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Loksabha Election: पंजाब में कांग्रेस ने दिग्गजों की सियासी जमीन बदली, वर्चस्व की लड़ाई में बदली रणनीति

Tue, 07 May 2024 04:01 PM IST
निवेदिता वर्मा सुशील कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, सुनाम ऊधम सिंह वाला

सार

कांग्रेस को उम्मीद है कि नए क्षेत्रों में दिग्गज नेताओं को चुनाव मैदान में उतारे जाने से जहां पार्टी एकजुट रखी जा सकेगी, वहीं लंबे समय से एक ही क्षेत्र में रहने की वजह से पनपने वाली वर्करों की नाराजगी या खींचतान की सियासी बीमारी पर अंकुश लगेगा।
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कांग्रेस - फोटो : संवाद
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विस्तार
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2019 के लोकसभा चुनाव में देश में मात्र 52 सीटें जीतने वाली कांग्रेस पार्टी को पंजाब में जबरदस्त सफलता मिली थी। पंजाब की 13 सीटों में से 8 सीटें जीतकर कांग्रेस ने आप समेत अन्य दलों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया था। 
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अब विरोधी दल, कांग्रेस को कमजोर करके लोकसभा चुनाव में अपनी सियासी नैया पार लगाने की कोशिश में हैं, लेकिन कांग्रेस भी विरोधियों के सियासी प्रहार का सामना सीना तानकर कर रही है। 2024 लोकसभा चुनाव से पहले विरोधी दलों की जोरदार सेंधमारी झेलने के बाद कांग्रेस ने खुद को पंजाब में नए सिरे से खड़ा करने की कोशिश की है। अपने दिग्गज चेहरों की सियासी ज़मीन बदल कर कांग्रेस ने विरोधियों को तगड़ी चुनौती दी है। 

कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, तेज तर्रार नेता सुखपाल सिंह खैरा, पूर्व कैबिनेट मंत्री विजयइंदर सिंगला की सियासी ज़मीन बदल दी। इसके अलावा मनीष तिवारी को भी चंडीगढ़ भेजा गया है। इन चेहरों के लिए चुनाव किसी इम्तिहान से कम नहीं हैं। नाजुक वक्त में दिग्गजों के अनुभव की परीक्षा होगी और देखना होगा कि दिग्गज कैसे सियासी बाधाओं को पार करते हैं?
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कांग्रेस को उम्मीद है कि नए क्षेत्रों में दिग्गज नेताओं को चुनाव मैदान में उतारे जाने से जहां पार्टी एकजुट रखी जा सकेगी, वहीं लंबे समय से एक ही क्षेत्र में रहने की वजह से पनपने वाली वर्करों की नाराजगी या खींचतान की सियासी बीमारी पर अंकुश लगेगा। बड़े चेहरे होने की वजह से दूसरी और तीसरी कतार के नेता साथ रहेंगे। ऐसे में पार्टी को जहां लोकसभा चुनाव में फायदा होने की आशा है, वहीं आने वाले समय में खुद को ज्यादा मजबूत बनाए रखने में मदद मिलेगी। 

दूसरी तरफ किसानों की ओर से भाजपा का विरोध करने से कांग्रेस को आस की किरण दिखाई दे रही है। पार्टी को उम्मीद है कि उसे ग्रामीण व शहरी दोनों इलाकों से वोट मिलेंगे। इसके अलावा कांग्रेस मान कर चल रही है कि पंजाब में सत्ता विरोधी लहर है और इसका फायदा उसे होगा। वोट विभाजन के गणित पर भी कांग्रेस नजरें गढ़ाए हुए हैं।

कांग्रेस में हर दल ने की सेंधमारी
पंजाब में कांग्रेस को मजबूत देख तमाम सियासी दलों ने ज़बरदस्त सेंधमारी की है। कांग्रेस के दो वर्तमान सांसदों परनीत कौर व रवनीत सिंह बिट्टू को भाजपा ने पटा कर चुनाव मैदान में उतारा है। कांग्रेस के विधायक राज कुमार चब्बेवाल व पूर्व विधायक गुरप्रीत सिंह जेपी को आप ने अपने पाले में कर उम्मीदवार बनाया है। 

कांग्रेस के मोहिंदर सिंह केपी को अकाली दल ने पटा लिया। कांग्रेस को कमजोर करने का हर सियासी तरीका विरोधी दल अपना रहे हैं, लेकिन कांग्रेस भी हार मानती नहीं दिख रही है, बल्कि नए दांव से विरोधियों को चारों खाने चित्त कर की रणनीति पर काम कर रही है। 2019 का प्रदर्शन दोहराने के लिए कांग्रेस अपने पुराने धुरंधरों के जरिए नया प्रयोग कर रही है। नई सियासी जमीन पर पुराने दिग्गज चेहरों को चुनाव मैदान में उतारने का दांव खेल कर कांग्रेस ने पंजाब के चुनाव को रोचक व चुनौतीपूर्ण बना दिया है। 

कांग्रेस के विधायक व संगरूर से उम्मीदवार सुखपाल सिंह खैरा ने कहा कि यह चुनाव लोकतंत्र को बचाने के लिए है। केंद्र व पंजाब में लोकतंत्र को खतरा है। जनता असुरक्षित है। हक के लिए उठने वाली आवाज को सत्ता के बल पर दबाया जा रहा है। कांग्रेस, जनहित की रक्षा के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। बहरहाल, सेंधमारी झेलने के बाद कांग्रेस ने खुद को मजबूती से खड़ा करने के लिए पैराशूट कैंडिडेट का तगड़ा दांव खेला है, लेकिन दिग्गजों का अनुभव कांग्रेस को जीत दिला पाएगा और कांग्रेस का यह दांव, मतदाताओं को लुभा पाएगा या नहीं यह आने वाला वक्त तय करेगा।
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