चंडीगढ़। नगर निगम के मेयर चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने गठबंधन का फैसला किया है। दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच सहमति बनने के बाद यह साफ हो गया है कि इस बार भी विपक्ष साझा रणनीति के साथ मैदान में उतरेगा। गठबंधन के तहत मेयर पद के लिए आम आदमी पार्टी अपना उम्मीदवार उतारेगी जबकि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पदों पर कांग्रेस के प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे।
इसकी औपचारिक घोषणा मंगलवार को चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लक्की ने पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में की। इस मौके पर चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी भी मौजूद रहे। लक्की ने बताया कि आम आदमी पार्टी के नेताओं के साथ सभी स्तरों पर बातचीत पूरी हो चुकी है और पदों के बंटवारे पर सहमति बन गई है। उन्होंने कहा कि इस पूरे फार्मूले पर सांसद मनीष तिवारी की भी सहमति है। तिवारी ने भी गठबंधन को शहर के हित में जरूरी बताते हुए इस पर मुहर लगाई।
बीते दिनों कांग्रेस-आप गठबंधन को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई थी। आम आदमी पार्टी के चंडीगढ़ प्रभारी और दिल्ली के विधायक जरनैल सिंह की एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद राजनीतिक हलकों में गठबंधन टूटने की अटकलें तेज हो गई थीं। उस पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की तस्वीर साझा कर चंडीगढ़ में पदों के बंटवारे पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद दोनों दलों के बीच मतभेद की चर्चाएं शुरू हो गई थीं लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है और दोनों दल फिर साथ आ गए हैं।
18-18 का बराबरी वाला खेल
नगर निगम के मौजूदा समीकरण पर नजर डालें तो कुल 35 पार्षद हैं और सांसद के वोट को मिलाकर मेयर चुनाव 36 वोटों से होता है। जीत के लिए 19 वोट जरूरी हैं। इस समय भाजपा के पास 18 पार्षद हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी के 11 और कांग्रेस के 6 पार्षद हैं। दोनों दलों के पार्षद मिलकर 17 होते हैं लेकिन कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के वोट के साथ विपक्ष का आंकड़ा भी 18 पर पहुंच जाता है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस-आप गठबंधन, दोनों के पास बराबर 18-18 वोट हैं और मुकाबला पूरी तरह कांटे का हो गया है।
आखिरी साल में बदले समीकरण
दिलचस्प यह है कि 2021 के नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी 14 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। भाजपा को 12 और कांग्रेस को 8 सीटें मिली थीं लेकिन निगम के कार्यकाल के आखिरी वर्ष में समीकरण पलट गए। 24 दिसंबर को आप की दो पार्षद सुमन और पूनम के भाजपा में शामिल होने के बाद भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन गई और पूरा राजनीतिक गणित बदल गया।
कांग्रेस के भीतर भी हलचल
हालांकि, गठबंधन की घोषणा के बीच कांग्रेस के अंदरूनी हालात भी चर्चा में रहे। पार्टी अध्यक्ष एचएस लक्की के आवास पर हुई कांग्रेस पार्षदों की बैठक में छह में से तीन पार्षदों की गैरहाजिरी ने सवाल खड़े किए। गुरप्रीत सिंह गाबी, दर्शना रानी और निर्मला देवी के न आने को लेकर असंतोष की चर्चाएं रहीं, हालांकि पार्षदों ने इस पर सार्वजनिक टिप्पणी से बचना ही बेहतर समझा।