म्हारे प्रदेश का पौधा क्लोन न केवल यहां पर बल्कि दूसरे प्रदेश में भी अपनी विशेष पहचान बना चुका है। पौधे की गुणवत्ता और कम खर्च में बेहतर क्लोन तैयार होने की वजह से हरियाणा के पौधों के क्लोन की डिमांड दूसरे राज्यों में बढ़ी है।
वन विभाग की मानें तो यहां पर क्लोन पांच रुपये में तैयार होता है, वहीं दूसरे राज्यों की बात करें तो एक पौधे की क्लोन पर आठ रुपये खर्च आता है। हरियाणा के पौधे की क्लोन का प्रसिद्ध होने का दूसरा सबसे बड़ा कारण लकड़ी की अच्छी क्वालिटी देने को लेकर देखा जा रहा है।
इसके रिजल्ट भी सामने आ चुके हैं। वन विभाग की करनाल नर्सरी में हर साल पंद्रह से बीस लाख पौधों की क्लोन तैयार की जाती है। इसमें से दो लाख पौधे दूसरे राज्यों में भेजे जाते हैं। बाकी के वन विभाग स्वयं ही लगाता है। सबसे ज्यादा क्लोन की सप्लाई बिहार, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश को की जाती है। अधिकारी बताते हैं कि यदि जरूरत पड़ती है तो मजबूरी में इन राज्यों से भी मंगवानी पड़ती है। लेकिन इन राज्यों की पौधों की कॉस्ट और गुणवत्ता को आंका जाए तो हरियाणा की क्वालिटी कहीं बेहतर है।
दो लाख पौधों को किया जाता है एक्सपोर्ट
दो लाख पौधों का क्लोन दूसरे राज्यों को एक्सपोर्ट किया जाता है। जिन राज्यों में पौधे मांगे जाते हैं वहां पर क्लोन तैयार करने का खर्च अधिक है। तकरीबन पेड़ों को प्लाइवुड मार्केट में बढ़िया बोली पर जाते हैं। इस कारण वन विभाग सहित जो पौधे लगाते हैं उनको मुनाफा होता है। उम्र पूरी होने के कारण पेड़ों का काट लेना जरूरी है। नहीं तो वह गिरकर अनहोनी घटना हो अंजाम दे सकते हैं।
प्लाइवुड के लिए लगाई जाती है क्लोेन
वैसे तो कई प्रकार के पौधे लगाए जाते हैं। लेकिन क्लोन लगाने का मकसद केवल उनसे प्लाइवुड की पैदावार ही होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जो प्लाइवुड सफेदा, पापुलर व अन्य लकड़ियों की क्वालिटी क्लोन से निकलती है वह किसी अन्य पौधे से नहीं निकाली जा सकती। इस कारण इसकी डिमांड निरंतर बढ़ रही है।
इन पौधों की तैयार होती है क्लोन
पौधा वर्ष
सफेदा 20
शीशम 60
कीकर 48
पापुलर 06