चंडीगढ़। पीयू सीनेट चुनाव स्थगित करने के आधार संबंधी अभिलेख मिलने के बाद मंगलवार को कांग्रेसी सीनेटरों ने अपना धरना समाप्त कर दिया। साथ ही सीनेटर व सिंडिकेट के कई सदस्यों ने प्रेसवार्ता कर एलान कर दिया कि यदि वीसी सिंडिकेट की बैठक नहीं बुलाते हैं तो वह हाईकोर्ट जाएंगे। गोयल ग्रुप ने पीयू वीसी समेत कई अधिकारियों को कठघरे में खड़ा किया है। उधर, भाजपाइयों ने कांग्रेस के सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सीनेट चुनाव अधिकारी के कार्यालय में जबरन घुसकर धरने के बहाने चुनाव के अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ की गई है। ऐसे में इन पर रिपोर्ट दर्ज कराई जाए।
मंगलवार को धरना खत्म होने के बाद कांग्रेसी सीनेटरों ने पीयू गेस्ट हाउस में प्रेसवार्ता की। सीनेट एवं सिंडिकेट सदस्य अशोक गोयल ने कहा कि पीयू में इस समय खुशी का माहौल नहीं है। वह दुखी हैं। वीसी ने सीनेट चुनाव स्थगित कर लोकतंत्र की हत्या की है। इससे दो दिन पहले वीसी से सिंडिकेट के मेंबर मिले थे। उन्होंने कहा था कि उन्हें अंदेशा है कि चुनाव स्थगित किए जा सकते हैं, इसलिए चुनाव न टाले जाएं। आश्वासन भी मिला लेकिन चुनाव स्थगित कर दिए गए। गोयल ने कहा कि सोमवार को वह रजिस्ट्रार के पास चुनाव स्थगित संबंधी आधार वाले दस्तावेज मांगने पहुंचे तो उन्हें अभिलेख नहीं दिए गए। इसके कारण रातभर धरना देने को विवश होना पड़ा। अब अभिलेख मिले हैं लेकिन उनके आधार पर चुनाव स्थगित नहीं किए जा सकते। क्योंकि चुनाव स्थगित करने से पहले वीसी को सिंडिकेट को यह बताना चाहिए था और उसके लिए बैठक बुलानी चाहिए थी। सर्वसम्मति से चुनाव पर निर्णय लिया जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। कहा कि यह सब राजनीतिक रूप से हुआ है। उन्होंने वाइस प्रेसीडेंट कार्यालय पर भी सवाल उठाए।
हर जगह चुनाव हो रहे तो सीनेट का चुनाव क्यों नहीं : गोयल
अशोक गोयल ने कहा कि पीयू फैकल्टी के चुनाव संभव थे। उन्होंने आंकड़े भी सामने रखे। कहा कि 15 अगस्त को 100 से अधिक लोगों ने एक साथ कार्यक्रम किया। उस दौरान नियम याद क्यों नहीं आए। उन्होंने कहा, जब बिहार में मुख्य निर्वाचन आयुक्त चुनाव करवाने की घोषणा कर चुके हैं। राजस्थान में असेंबली का गठन हो गया। हरियाणा में चुनाव हुए। एसजीपीसी की भी चुनावी प्रक्रिया हुई तो फिर सीनेट का चुनाव क्यों नहीं हो सकता था। अगर स्नातक चुनाव में अधिक दिक्कतें आ रही थीं तो फैकल्टी के चुनाव तो करवाने चाहिए थे। कहा कि पूरी तरह राजनीति की गई है। प्रो. नवदीप गोयल ने कहा कि सिंडिकेट की बैठक बुलाने के लिए वीसी से कहा गया है। वह अभी कॉल नहीं उठा रहे हैं। सिंडिकेट की बैठक में यह प्रस्ताव लाया जाना चाहिए। यदि सिंडिकेट की बैठक नहीं हुई तो वह हाईकोर्ट जाएंगे। इस दौरान सिंडिकेट व सीनेट के कई सदस्य मौजूद रहे।
रजिस्ट्रार सीनेट चुनाव के आरओ, दफ्तर में नहीं जा सकते उम्मीदवार : डा. सुभाष शर्मा
उधर, सीनेट में भाजपा के सदस्य डॉ. सुभाष शर्मा समेत 21 सीनेटरों ने वीसी प्रो. राजकुमार को पत्र भेजकर कहा है कि सीनेट चुनाव का टालने का अधिकार वीसी के पास है। इस समय पूरी दुनिया में आपात स्थिति है। बावजूद इसके सिंडिकेट व सीनेट के कुछ सदस्यों ने रजिस्ट्रार कार्यालय में घुसकर धरना देने का बहाना बनाया। कहा कि सीनेट चुुनाव का रिटर्निंग अधिकारी रजिस्ट्रार होता है। उसके कार्यालय को रातभर बंधक बनाया गया। आरोप है कि धरने के बहाने से चुनाव के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ भी करने की पूरी संभावना है। अन्य महत्वपूर्ण अभिलेख भी रजिस्ट्रार कार्यालय में होते हैं। उन अभिलेखों से भी छेड़छाड़ संभव है।
इस पूरे मामले की जांच करवाई जाए और संबंधित लोगों पर रिपोर्ट दर्ज हो। उन्होंने यह भी कहा है कि चुनाव अधिकारी के कार्यालय में उम्मीदवार नहीं जा सकते लेकिन उन्होंने कई घंटों तक कार्यालय को बंधक बनाया है। यह गंभीर प्रकरण है। वीसी व चुनाव अधिकारी अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए कार्रवाई करें। यह भी कहा है कि कोरोना के चलते चंडीगढ़ में प्रेसवार्ता पर पाबंदी लगाई गई है लेकिन कांग्रेसी सीनेटरों ने प्रेसवार्ता की। पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की जाए। उन्होंने धरने देने वाले लोगों के बारे में कहा कि यह लोग अपने को भगवान समझने लगे हैं। पीयू वीसी के अधिकारों व पीयू कैलेंडर को बंधक बनाया है। अब वह कानून का भी पालन नहीं कर रहे हैं। पत्र देने वालों में डॉ. बलजिंदर सिंह, डॉ. मुकेश अरोड़ा, डॉ. एसएस संघा, डॉ. आरएस झांजी, डॉ. अजय रंगा, डॉ. जगदीश मेहता, वरिंदर गिल, डॉ. गुरमीत सिंह, डॉ. एनआर शर्मा, डॉ. नीरू मलिक, प्रो. राजिंदर भंडारी, डॉ. गुरदीप शर्मा, अनिलेश महाजन, सुरेश टंडन, संजय टंडन, डॉ. अमित जोशी, संदीप धूरिया, डॉ. आरके महाजन व डॉ. बीसी जोसन शामिल हैं।