चंडीगढ़ पीजीआई के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर की स्थिति बेहद गंभीर है। यहां जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे बच्चों को इलाज के साथ बीमारी भी बांटी जा रही है। सेंटर की इमरजेंसी और नियोनेटल केयर यूनिट में एक-एक बेड पर तीन से चार बच्चों को भर्ती किया गया है। इससे उनमें क्रॉस इन्फेक्शन का खतरा है। यहां एक बच्चा दूसरे बच्चे को लात मार रहा है तो कोई किसी की ड्रिप खींच दे रहा है। हैरानी की बात है कि मानकों की अनदेखी कर बच्चों को गंभीर स्थिति में धकेलने का काम किया जा रहा है। वहीं यहां पर तैनात डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ चाहकर भी कुछ नहीं कर सकता।
अस्पताल में इलाज के दौरान एक मरीज से दूसरे या उसके संपर्क में आने वाले लोगों को होने वाला संक्रमण क्रॉस इन्फेक्शन कहा जाता है। इस दौरान कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति में संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है।
-चिकित्सा उपकरण
-खांसना और छींकना
-मानव संपर्क
-दूषित वस्तुओं को छूना
-गंदा बिस्तर
-लंबे समय तक कैथेटर
दस्त, सेप्सिस, निमोनिया, डीहाइड्रेशन, मल्टीसिस्टम ऑर्गन फेल्योर के साथ कई मामलों में संक्रमण के कारण मौत भी होने का खतरा रहता है।
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के अनुसार अस्पताल के वार्ड में भर्ती मरीजों के बेड कम से कम छह फीट की दूरी पर होने चाहिएं ताकि उनके खांसने, छींकने से वहां मौजूद दूसरे मरीज को संक्रमण का खतरा न हो। वहीं, एचआईवी पॉजिटिव, हैपेटाइटिस या सेप्टिसीमिया के मामलों में मरीज से वार्ड के दूसरे मरीजों, परिजनों या स्टाफ को संक्रमण न हो सके।